यूपी के सरकारी स्कूलों की बदहाली दिखाने पर कार्रवाई का विवाद: कई जिलों में एफआईआर, गिरफ्तारियों से उठे सवाल

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यूपी के सरकारी स्कूलों की बदहाली दिखाने पर कार्रवाई का विवाद: कई जिलों में एफआईआर, गिरफ्तारियों से उठे सवाल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सरकारी और परिषदीय विद्यालयों की व्यवस्थाओं को लेकर पिछले कुछ समय से छात्र-छात्राओं, अभिभावकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से आवाज उठाए जाने के मामले सामने आ रहे हैं। कहीं शिक्षकों की कमी को लेकर विद्यार्थी प्रदर्शन कर रहे हैं तो कहीं जर्जर भवन, खराब सड़क, पेयजल, शौचालय, भोजन और छात्रावास की व्यवस्थाओं को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। इसी बीच स्कूलों की कथित बदहाली को वीडियो के जरिए सोशल मीडिया पर दिखाने वाले कुछ लोगों के खिलाफ विभिन्न जिलों में एफआईआर और गिरफ्तारी की कार्रवाई ने नया विवाद खड़ा कर दिया है।

मामले को लेकर एक तरफ प्रशासन का कहना है कि बिना अनुमति स्कूल परिसर में प्रवेश कर वीडियो बनाना, बच्चों की तस्वीरें लेना अथवा भ्रामक सामग्री सोशल मीडिया पर प्रसारित करना नियमों के खिलाफ है। वहीं दूसरी ओर संबंधित लोगों और विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकारी स्कूलों की वास्तविक समस्याओं को सामने लाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

कई जिलों में छात्रों ने उठाई स्कूल की समस्याओं को लेकर आवाज

पिछले कुछ सप्ताह में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां विद्यार्थियों ने अपने विद्यालयों की समस्याओं को लेकर प्रदर्शन किया।

लखनऊ में 17 अगस्त को जयप्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय की करीब 250 छात्राओं ने शिक्षकों की कमी को लेकर प्रदर्शन किया। तेज बारिश के बावजूद छात्राएं स्कूल से लगभग ढाई किलोमीटर दूर दुबग्गा-कानपुर बाईपास तक पहुंचीं और सड़क पर मानव श्रृंखला बनाकर अपनी मांगें रखीं। छात्राओं का कहना था कि भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और बोर्ड परीक्षाओं के समय शिक्षकों की कमी विद्यार्थियों के लिए परेशानी का कारण बन रही है।

फतेहपुर के किशनपुर में 28 जुलाई को सर्वोदय इंटर कॉलेज के करीब एक हजार छात्र-छात्राओं ने स्कूल की मूलभूत सुविधाओं को लेकर प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों ने जर्जर कक्षाओं, टपकती छत, पंखों की कमी, स्वच्छ पेयजल, फर्नीचर और शौचालय जैसी समस्याओं को सामने रखा। प्रशासन के आश्वासन के बाद विद्यालय में पंखे और आरओ पानी की व्यवस्था किए जाने की बात सामने आई।

हमीरपुर में 11 अगस्त को चांदपुर और आसपास के गांवों के 200 से अधिक विद्यार्थी तथा करीब 50 अभिभावक तिरंगा यात्रा निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। उनकी मुख्य मांग स्कूल तक पक्की सड़क बनाने की थी। ग्रामीणों का कहना था कि बारिश के दौरान रास्ता कीचड़ और दलदल में बदल जाता है, जिससे बच्चों को स्कूल आने-जाने में परेशानी होती है।

कन्नौज के अनौगी स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में भी विद्यार्थियों द्वारा छात्रावास की व्यवस्थाओं और भोजन की गुणवत्ता को लेकर विरोध किए जाने की जानकारी सामने आई। विद्यार्थियों ने पानी, भोजन और हॉस्टल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की बात कही गई।

उन्नाव के मोहान स्थित जयप्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय में 19 अगस्त को 200 से अधिक विद्यार्थियों के सड़क पर उतरने का मामला सामने आया। छात्रों ने शिक्षकों की कमी, भोजन, पेयजल और छात्रावास से जुड़ी समस्याओं की शिकायत की। अधिकारियों के मौके पर पहुंचने के बाद स्थिति का जायजा लिया गया और भोजन की गुणवत्ता की जांच के लिए अधिकारियों ने विद्यार्थियों के साथ खाना भी खाया।

कानपुर के घाटमपुर क्षेत्र के भटपुरवा सामूही गांव में 22 अगस्त को प्राथमिक विद्यालय के बच्चों के स्कूल भवन को लेकर विरोध करने की जानकारी सामने आई। बच्चों की मांग नई इमारत से जुड़ी थी। विद्यालय भवन के एक हिस्से को हटाए जाने के बाद स्कूल की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए गए थे।

स्कूलों की स्थिति के वीडियो सोशल मीडिया पर आने लगे

छात्रों के प्रदर्शनों के साथ-साथ सरकारी स्कूलों की स्थिति दिखाने वाले वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित होने लगे। इनमें स्कूल परिसरों की साफ-सफाई, शौचालय, भवन, पेयजल, रास्तों, मलबे और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी तस्वीरें शामिल थीं।

इसी बीच कुछ राजनीतिक दलों और संगठनों की ओर से सरकारी स्कूलों की स्थिति को सामने लाने के लिए अभियान चलाने की घोषणा की गई। आम लोगों और कार्यकर्ताओं से स्कूलों की वास्तविक स्थिति के वीडियो और तस्वीरें साझा करने की अपील की गई।

इसके बाद उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बेसिक शिक्षा अधिकारियों की ओर से स्कूल परिसरों में बाहरी व्यक्तियों, यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया कंटेंट बनाने वालों के प्रवेश तथा वीडियो रिकॉर्डिंग को लेकर निर्देश जारी किए गए।

रिपोर्ट के मुताबिक हापुड़, अयोध्या, बलरामपुर, आगरा, बलिया, बस्ती और आजमगढ़ समेत कई जिलों में इस संबंध में आदेश जारी किए गए हैं। प्रशासन का तर्क है कि बिना अनुमति स्कूल में प्रवेश, बच्चों की फोटो या वीडियो बनाना उनकी निजता और सुरक्षा से जुड़ा विषय है। साथ ही इससे शिक्षण कार्य प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है।

स्कूल की बदहाली का वीडियो बनाने पर हाथरस में मामला

हाथरस के सिकंदराराऊ क्षेत्र के नावलि सिविलियन विद्यालय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया।

वीडियो में स्कूल परिसर के कथित तौर पर गंदे हिस्से, गोबर, शौचालय और अन्य अव्यवस्थाएं दिखाई गई थीं। वीडियो बनाने वाले व्यक्ति ने विद्यालय की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए अधिकारियों तक वीडियो पहुंचाने की अपील की थी।

शिक्षा विभाग की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया। विभाग की ओर से आरोप लगाया गया कि स्कूल के ऐसे हिस्से को जानबूझकर रिकॉर्ड किया गया जो पहले से ही उपयोग में नहीं था और वीडियो के माध्यम से भ्रामक तस्वीर प्रस्तुत कर विभाग की छवि खराब करने का प्रयास किया गया।

मामले में आईटी एक्ट की धारा 66(डी) और बीएनएस की धारा 229(2) के तहत कार्रवाई की जानकारी सामने आई है।

वहीं आरोपी के परिवार की ओर से इन आरोपों से असहमति जताई गई। परिवार का कहना है कि वीडियो का उद्देश्य केवल विद्यालय में मौजूद कथित गंदगी और समस्याओं को सामने लाना था।

मेरठ में दो लोगों पर एफआईआर और गिरफ्तारी

मेरठ के सरधना क्षेत्र में भी स्कूल की व्यवस्थाओं से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला दर्ज किया गया।

शिक्षा विभाग की शिकायत के अनुसार, कुछ लोगों ने बिना अनुमति विद्यालय परिसर में पहुंचकर वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित किया। वीडियो में कथित तौर पर विद्यालय के एक कमरे में बड़ी संख्या में सरकारी किताबें फर्श पर पड़ी दिखाई गई थीं। कुछ किताबों के खराब होने की बात भी वीडियो में कही गई।

शिक्षा विभाग ने वीडियो को भ्रामक बताते हुए पुलिस में शिकायत की। मामले में बीएनएस की धारा 353(2) और 356(2) के तहत कार्रवाई की गई। रिपोर्ट के अनुसार दो लोगों को गिरफ्तार किया गया, हालांकि बाद में उन्हें 24 घंटे के भीतर जमानत मिल गई।

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में भी कार्रवाई

नोएडा में सेक्टर-51 के होशियारपुर गांव स्थित सरकारी स्कूल में बिना अनुमति प्रवेश कर वीडियो बनाने के आरोप में आम आदमी पार्टी से जुड़े एक पदाधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

वीडियो में स्कूल परिसर की कथित गंदगी, शौचालय और जमीन की स्थिति दिखाई गई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया।

ग्रेटर नोएडा के बादलपुर थाना क्षेत्र में भी एक माध्यमिक विद्यालय में बिना अनुमति पहुंचकर वीडियो बनाने के आरोप में अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। पुलिस द्वारा वीडियो बनाने वाले लोगों की पहचान किए जाने की प्रक्रिया की बात सामने आई है।

देवरिया में स्कूल परिसर में मलबे का वीडियो बना विवाद का कारण

देवरिया के गौरीबाजार क्षेत्र में एक प्राथमिक विद्यालय का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था। इसमें स्कूल परिसर में मलबा, कचरा और जर्जर हिस्से दिखाई दे रहे थे।

प्रशासन की ओर से कहा गया कि मलबा पहले से अनुपयोगी घोषित भवन को गिराए जाने के बाद बचा था और उसे हटाने की प्रक्रिया चल रही थी। वीडियो को कथित रूप से भ्रामक बताते हुए मामला दर्ज किया गया।

वहीं वीडियो बनाने वाले व्यक्ति ने सवाल उठाया कि यदि स्कूल परिसर में मलबा मौजूद था और कैमरे में उसकी तस्वीर आई तो उसे दिखाना गलत कैसे हो सकता है।

अमेठी में भी अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला

अमेठी में भी सरकारी स्कूल की कथित बदहाली से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।

पुलिस के अनुसार वीडियो बनाने वाले व्यक्ति की पहचान अभी नहीं हो सकी है और सीसीटीवी फुटेज की मदद से पहचान का प्रयास किया जा रहा है।

कन्नौज में छात्रों के प्रदर्शन के पीछे साजिश का आरोप

कन्नौज के गुगरापुर स्थित पीएम श्री उत्तर प्रदेश कंपोजिट स्कूल में विद्यार्थियों ने पढ़ाई का बहिष्कार कर प्रधानाचार्य के खिलाफ प्रदर्शन किया था। छात्रों और अभिभावकों ने विद्यालय में शिक्षकों की कमी और प्रधानाचार्य के व्यवहार को लेकर आरोप लगाए थे।

विद्यार्थियों की ओर से यह भी कहा गया कि लंबे समय से गणित विषय का नियमित शिक्षक उपलब्ध नहीं है और विज्ञान के शिक्षक से गणित पढ़ाया जा रहा है।

हालांकि प्रशासन की ओर से आरोप लगाया गया कि कुछ अज्ञात लोगों ने बच्चों को बिस्किट देकर प्रदर्शन के लिए उकसाया और सरकार तथा शिक्षा विभाग की छवि खराब करने का प्रयास किया। इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई।

रामपुर में नदी पार कर स्कूल जाने का वीडियो भी विवाद में

रामपुर में बच्चों के नदी पार कर स्कूल जाने का वीडियो सामने आने के बाद भी मामला दर्ज किए जाने की जानकारी है।

प्रशासन का कहना है कि वीडियो में स्कूल तक पहुंचने के लिए नदी से गुजरते हुए बच्चों को दिखाया गया, जबकि स्कूल जाने के लिए दूसरा रास्ता भी उपलब्ध था। इसी आधार पर वीडियो को भ्रामक बताया गया।

दूसरी ओर वीडियो से जुड़े लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान वास्तविक परिस्थितियों को सामने लाने के उद्देश्य से तस्वीरें और वीडियो बनाए गए थे।

मथुरा में जलभराव का वीडियो भी बना मुद्दा

मथुरा के फरह क्षेत्र में प्राथमिक विद्यालय तक पहुंचने वाले रास्ते में जलभराव से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया गया। वीडियो में बच्चों को पानी भरे रास्ते से गुजरते हुए दिखाया गया था।

प्रशासन की ओर से इसे भ्रामक बताते हुए कार्रवाई की बात कही गई, जबकि वीडियो बनाने वाले व्यक्ति ने दावा किया कि स्कूल के रास्ते में वास्तव में जलभराव था और बच्चे प्रभावित हो रहे थे।

सरकार ने भ्रामक वीडियो पर जताई नाराजगी

सरकारी स्कूलों से जुड़े वीडियो और सोशल मीडिया पर उठ रहे विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों के साथ बैठक में कथित भ्रामक वीडियो पर नाराजगी जताई। अधिकारियों को ऐसे मामलों में नियमों के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

साथ ही मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सरकारी विद्यालयों का निरीक्षण कर मिड-डे मील, शौचालय, पेयजल, कक्षाओं और अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति जांचने के निर्देश दिए।

सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा, निजता और शिक्षण व्यवस्था को प्रभावित करने वाली गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जा सकती।

करीब 40 हजार स्कूलों में 14 बिंदुओं पर जांच

इसी बीच प्रदेश में बड़ी संख्या में बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों की व्यवस्थाओं की जांच के लिए 14 बिंदुओं पर आधारित निरीक्षण व्यवस्था लागू किए जाने की बात सामने आई है।

इसमें विद्यालयों में—

पेयजल व्यवस्था

शौचालय

बिजली

साफ-सफाई

कक्षाओं की स्थिति

मध्याह्न भोजन

विद्यार्थियों की सुरक्षा

बुनियादी ढांचा

अन्य आवश्यक सुविधाएं

जैसे बिंदुओं की जांच की जानी है।

सरकार का कहना है कि विद्यालयों में यदि कोई कमी है तो उसका निरीक्षण कर उसे दूर किया जाना चाहिए और अधिकारियों को नियमित रूप से स्कूलों की स्थिति की निगरानी करनी चाहिए।

कार्रवाई को लेकर उठे सवाल

पूरे विवाद का सबसे अहम सवाल यही है कि क्या सरकारी स्कूलों की कमियों को सार्वजनिक करने वालों पर कार्रवाई उचित है या नहीं?

प्रशासन का पक्ष है कि बिना अनुमति स्कूल परिसर में प्रवेश करना, बच्चों की तस्वीरें या वीडियो बनाना तथा भ्रामक सामग्री प्रसारित करना कानून और बच्चों की निजता से जुड़ा गंभीर विषय है। यदि किसी वीडियो में तथ्य तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किए जाते हैं तो उससे विभाग और विद्यालय की छवि प्रभावित हो सकती है।

दूसरी तरफ सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों का तर्क है कि सरकारी विद्यालय सार्वजनिक व्यवस्था का हिस्सा हैं और यदि वहां वास्तव में कोई गंभीर कमी है तो उसे सामने लाना व्यवस्था में सुधार का माध्यम बन सकता है। उनका कहना है कि समस्याओं की तस्वीर दिखाने वाले हर व्यक्ति को अपराधी मानने के बजाय शिकायतों की वास्तविकता की जांच होनी चाहिए।

अब असली चुनौती: शिकायत और कार्रवाई के बीच संतुलन

उत्तर प्रदेश में सामने आए इन मामलों ने सरकारी स्कूलों की व्यवस्था, बच्चों की शिकायतों, सोशल मीडिया की भूमिका और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी है।

एक ओर सरकार स्कूलों में सुविधाएं सुधारने और नियमित निरीक्षण की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर स्कूलों की कथित कमियों के वीडियो बनाने वाले कुछ लोगों के खिलाफ एफआईआर और गिरफ्तारी की घटनाएं सामने आई हैं।

ऐसे में जरूरत इस बात की है कि बच्चों की सुरक्षा और निजता का ध्यान रखते हुए शिकायतों के लिए पारदर्शी व्यवस्था मजबूत की जाए। यदि किसी विद्यालय में शिक्षक, भवन, शौचालय, पानी, भोजन या रास्ते जैसी वास्तविक समस्या है तो उसका समयबद्ध समाधान हो। वहीं यदि कोई व्यक्ति गलत या भ्रामक जानकारी फैलाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

इस पूरे विवाद का समाधान संभवतः इसी संतुलन में है कि न तो वास्तविक शिकायतों को दबाया जाए और न ही बिना सत्यापन के किसी विद्यालय या विभाग के खिलाफ भ्रामक सामग्री प्रसारित होने दी जाए।

यूपी के सरकारी स्कूलों की बदहाली दिखाने पर कार्रवाई का विवाद: कई जिलों में एफआईआर, गिरफ्तारियों से उठे सवाल

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