प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि 60 साल से अधिक सेवा पर अध्यापक को ग्रेच्युटी पाने का अधिकार नहीं है।
इसी के साथ कोर्ट ने 60 साल नौ माह 11 दिन की सेवा के बाद स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाली बेसिक स्कूल की प्रधानाध्यापिका को ग्रेच्युटी पाने का हकदार नहीं माना। न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने प्रधानाध्यापिका के बेटे एटा निवासी मिर्जा इमरान बेग की याचिका खारिज कर दी।
याची ने अपनी मां की बकाया ग्रेच्युटी की मांग करते हुए याचिका दाखिल की थी।
कोर्ट ने शासनादेश का हवाला देते हुए कहा कि केवल 60 साल की आयु में सेवानिवृत्त होने वाले अध्यापक ही ग्रेच्युटी के हकदार हैं। याची की मां ने 60 साल की उम्र में सेवानिवृत्ति मांगी थी लेकिन शिक्षा सत्र का लाभ लेते हुए उन्होंने 60 साल से अधिक सेवा की।
याची ने बेसिक शिक्षा अधिकारी एटा के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उन्होंने शासनादेश के आधार पर ग्रेच्युटी देने से इन्कार कर दिया था।
बीएसए के अधिवक्ता ने दलील दिया कि प्रधानाध्यापिका की सेवा नियत अर्हता के अधीन नहीं थी। इसलिए वह ग्रेच्युटी की हकदार नहीं हैं।
कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद याचिका को खारिज करते हुए राहत देने से इन्कार कर दिया।
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