इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हलफनामा दाखिल करने में सरकारी वकीलों के लापरवाही पूर्ण रवैया को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने कहा कि सरकार के वकील अक्सर न्यायालय के समक्ष हलफनामा दाखिल करते समय लापरवाही बरतते हैं। कोर्ट ने कहा कि राज्य प्राधिकारियों और राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों का रवैया बहुत ही लापरवाह है। कोर्ट ने हलफनामा दाखिल करने में हुई गलतियों या कमियों को सुधारने के लिए विभिन्न अवसरों पर छूट दी है लेकिन सब व्यर्थ रहा।
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल ने इंद्रवती देवी व अन्य की याचिका पर की है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी कमियों को दूर करने के लिए कई बार निर्देश दिए जाने के बावजूद राज्य सरकार लगातार लापरवाह रवैया अपना रही है। कोर्ट ने इस आदेश को प्रदेश के महाधिवक्ता व प्रमुख सचिव न्याय के समक्ष भेजने का निर्देश दिया है।कोर्ट ने यह टिप्पणी डीएम भदोही के द्वारा एक मामले में प्रस्तुत व्यक्तिगत हलफनामे में कुछ विसंगतियों को ध्यान में रखते हुए की, जिसमें एक निश्चित भूमि के लिए स्टाम्प शुल्क मूल्यांकन को चुनौती दी गई है।
कोर्ट ने कई बार समय देने के बाद भी हलफनामा दाखिल न करने पर डीएम भदोही से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा था।
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