प्रयागराज। जूनियर कक्षाओं में – पढ़ाए जाने वाले कृषि विज्ञान विषय का पाठ्यक्रम बदलेगा। पाठ्यक्रम में बदलाव के प्रथम चरण की कार्यशाला शुक्रवार को राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान में हुई।
चार चरणों में कार्यशाला के बाद पाठ्यक्रम तैयार होगा। नए सत्र से बदला हुआ पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा। अगले चरण की वर्कशॉप नवंबर में होगी।
नई शिक्षा नीति के अंतर्गत सभी विषयों में बदलाव किया जा रहा है। इसी क्रम में छह से आठ तक की कक्षाओं में कृषि विज्ञान के पाठ्यक्रम में बदलाव शुरू हो गया है।
इसके लिए 21 से 25 अक्तूबर तक कार्यशाला चली। इसमें महाविद्यालयों के प्रोफेसर, इंटर
कॉलेजों के प्रवक्ता और अन्य कृषि व उद्यान विशेषज्ञों को बुलाया गया। प्रवक्ता सुदामा प्रसाद ने बताया कि कृषि के पाठ्यक्रम में बदलाव की जरूरत थी। अब कृषि में आधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। पहले की किताबों में पारंपरिक खेती का विस्तृत वर्णन था। नई किताबें रोजगारपरक बनाई जा रही हैं। इसमें खेती में तकनीक का प्रयोग, जैविक खेती, व्यावसायिक खेती आदि के पाठ्यक्रम में काफी परिवर्तन किया जा रहा है। अब छात्रों को व्यवसायपरक शिक्षा देनी है।
उसी के अनुसार पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है। यह बदलाव बेसिक शिक्षा परिषद की पुरानी किताबों में किया जाएगा।
जनवरी तक सभी कार्यशाला पूरी करके मार्च तक किताब तैयार करनी है। नए सत्र से किताब बच्चों के हाथ में पहुंच जाएगी।
गणित और विज्ञान में बदली शब्दावली
यूपी बोर्ड के बाद बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में भी एनसीईआरटी की किताबों को चरणबद्ध तरीके लागू किया जा रहा है। इस बार एनसीईआरटी ने कक्षा छह की किताबों में बदलाव किया है। यह किताब अगले वर्ष बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में लागू होगी। इससे पहले गणित और विज्ञान की किताबों को यूपी के परिवेश में बदला जा रहा है। उसकी शब्दावली में बदलाव किया जा यूपा रहा है। इस बदलाव के लिए राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान में कार्यशाला हुई है।
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