शिक्षकों की पारस्परिक स्थानांतरण प्रक्रिया इस बार फिर से लटक सकती है। शिक्षण सत्र समाप्त होने में बमुश्किल पांच माह बचे हैं लेकिन पारस्परिक स्थानांतरण के आवेदन के लिए अब तक पोर्टल को खोला तक अन्तः जनपदीय पारस्परिक तबादले
नहीं गया है। पिछले वर्ष ही के लिए माह में पोर्टल के माध्यम से आवेदन लिए गए थे और इस साल जनवरी में ऐसे पात्र करीब 20 हजार शिक्षकों का स्थानांतरण हो सका था। इस बार अब तक पोर्टल ही नहीं खोला जा सका है।
शासनादेश के अनुसार एक शैक्षिक सत्र में दो बार पारस्परिक तबादले होंगे। पिछले वर्ष ग्रीष्मावकाश में शुरू
की गई स्थानांतरण प्रक्रिया शीत अवकाश में जाकर पूरी हो सकी थी। ऐसे में शीत अवकाश में होने वाले तबादले के लिए अब तक आवेदन की प्रक्रिया शुरू नहीं होने के कारण शीत अवकाश में स्थानांतरण प्रक्रिया के लटकने की आशंका व्यक्त की जाने लगी है। शिक्षकों की माने तो अन्तः जनपदीय तबादले हों या अन्तर्जनपदीय स्थानांतरण दोनों कार्य बेसिक शिक्षा विभाग में तय समय पर पूरी नहीं होती।
पिछले साल दो सत्र में एक बार ही तबादलाः पिछला अन्तः जनपदीय तबादला प्रक्रिया ग्रीष्म अवकाश के बाद जुलाई 2023 में शुरू हुई और जनवरी 2024 में पूरी होकर करीब 20 हजार शिक्षकों के तबादले की
सूची जारी हुई। शासनादेश है कि शिक्षकों के पारस्परिक स्थानांतरण एक शैक्षिक सत्र में दो बार यानि ग्रीष्म अवकाश और शीत अवकाश के दौरान होगी। इस व्यवस्था के पीछे शैक्षिक सत्र के दौरान स्थानांतरण होने पर विद्यालीय शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंक़ा व्यक्त की गई थी जो उचित भी था।
शिक्षक लगातार कर रहे पोर्टल खोलने की मांग
पारस्परिक तबादले में शासन व विभागीय स्तर पर हो रही लापरवाही से शिक्षकों के साथ-साथ उनके संगठनों में भी काफी रोष है। उनकी मांग है कि पारस्परिक तबादला नीति का पूरी तरह से पालन होना चाहिए। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के उपाध्यक्ष निर्भय सिंह कहते हैं कि शासन स्तर से जिले के अंदर से वर्ष भर पारस्परिक स्थानांतरण की अनुमति होने के बाद बेसिक शिक्षा के बहुत से शिक्षक प्रतिदिन 60 से 70 किलोमीटर की दूरी तय कर स्कूल जा रहे है।
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