केंद्र सरकार ऑनलाइन गेमिंग के क्षेत्र में बड़ा बदलाव करने जा रही है। इसके तहत देश की ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को एकल नियामक ढांचे के अंतर्गत लाने की योजना तैयार की जा रही है, जिससे विभिन्न राज्यों में लागू अलग-अलग कानूनों को समाप्त किया जा सके।
गृह मंत्रालय ने इस विषय पर चर्चा के लिए एक समिति का गठन किया है। इस मामले से जुड़े दो लोगों ने यह जानकारी दी। समिति में गृह मंत्रालय के अधिकारी, कानूनी और नीति विशेषज्ञ और गेमिंग उद्योग के कार्यकारी शामिल हैं। शुरुआती चरण में इस बात पर विचार किया गया कि क्या एक नया कानून लाने की आवश्यकता है, जो गेमिंग (कौशल आधारित खेल) और जुआ (संयोग आधारित खेल) के बीच अंतर स्पष्ट करे। यह मुद्दा लंबे समय से विवादित रहा है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ऑनलाइन गेमिंग को ‘कौशल का खेल’ और जुआ को ‘संयोग का खेल’ करार दे चुका है।
निवेश बढ़ने की उम्मीद
राज्य-स्तरीय नियम गेमिंग क्षेत्र में असमंजस पैदा करते हैं, क्योंकि गेम खेलने वाले केवल एक राज्य के भीतर ही नहीं, बल्कि विभिन्न राज्यों में अन्य खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं। अगर पूरे देश के लिए एकल कानून लागू किया जाता है तो यह विदेशी निवेशकों के विश्वास
को बहाल कर सकता है। पिछले दो वर्षों में नियामकीय अनिश्चितताओं के कारण इस क्षेत्र में विदेशी निवेश में 90 से अधिक की गिरावट आई है।
नए कानून की आवश्यकता
सरकार इस क्षेत्र में अपार विकास की संभावनाएं देख रही है। एक अधिकारी के अनुसार, ऑनलाइन गेमिंग उद्योग ने अपनी संभावनाओं को दर्शाते हुए कई प्रस्तुतियाँ दी हैं, जिससे विदेशी निवेश आकर्षित किया जा सके। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार एकल कानून को महत्वपूर्ण मानती है। यह कानून भारत की वित्तीय खुफिया इकाई (एफआईयू) को विदेशी कंपनियों पर नकेल कसने में भी मदद करेगा, जो अब तक इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित स्व-नियामक निकाय ढांचे से संभव नहीं हो सका है।
तकनीकी और गेमिंग कानून विशेषज्ञ जय सयता के अनुसार, इस तरह का एकीकृत कानून गेमिंग उद्योग के लिए राहत की बात होगी, जिसे अब तक कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि भारत का गेमिंग उद्योग अभी अपने शुरुआती चरण में है और अगर इसे सख्त नियमों से दबाया जाता है तो यह उद्योग अवैध ऑनलाइन जुआ संचालकों के नियंत्रण में आ सकता है। हालांकि, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार इस नियामक प्रक्रिया को कितनी स्पष्टता के साथ लागू करती है।
सट्टेबाजी ने बढ़ाई चिंता
सरकार दो महत्वपूर्ण कारणों से भी एकीकृत ढांचा लागू करना चाहती है। पहला, ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों पर कराधान को लेकर स्पष्टता की जरूरत है, क्योंकि इन कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट में 1.12 लाख करोड़ के जीएसटी नोटिस को चुनौती दी है। इस पर 18 मार्च से सुनवाई शुरू होगी। दूसरा, गृह मंत्रालय को उन विदेशी कंपनियों की गतिविधियों पर चिंता है, जो ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी की पेशकश कर रही हैं।
Basic Shiksha Khabar | PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News | Primarykamaster | Updatemarts | Primary Ka Master | Basic Shiksha News | Uptet News | primarykamaster | SHIKSHAMITRA






