परिषदीय विद्यालयों में की जाएगी 8800 ईसीसीई एजुकेटरों की भर्ती, ये होंगे प्रमुख काम व दायित्व, जानिए कितना मिलेगा रुपया – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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लखनऊ। परिषदीय प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालयों में चल रही बाल वाटिका को सशक्त बनाने के लिए 8800 अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन (ईसीसीई) एजुकेटर रखे जाएंगे। शिक्षा मंत्रालय ने इसकी सहमति देते हुए 113.30 करोड़ का बजट स्वीकृत किया है। बेसिक शिक्षा विभाग इनको संविदा पर 11 महीने के लिए रखेगा। इन्हें 10313 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलेगा।

प्रदेश के 1.33 लाख परिषदीय विद्यालयों में से 70 हजार से अधिक में को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन किया जाता है। यहां पर बाल वाटिका के रूप में तीन से छह साल तक के बच्चों की पढ़ाई होती है। वर्तमान में इसका जिम्मा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व संबंधित स्कूल का शिक्षक नोडल की भूमिका निभाता है।

बेसिक शिक्षा विभाग के उप सचिव आनंद कुमार सिंह की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि ईसीसीई एजुकेटर संबंधित विद्यालयों के आंगनबाड़ी केंद्र को बाल वाटिका के रूप में विकसित करने, यहां नामांकित तीन से छह

साल के बच्चों को पूर्व प्राथमिक शिक्षा देने का काम करेंगे।

डीएम की अध्यक्षता वाली समिति करेगी चयन

उप सचिव ने कहा है कि जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली आठ सदस्यीय समिति ईसीसीई एजुकेटर का चयन करेगी। इसमें डायट प्राचार्य, बीएसए, जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला सेवायोजन अधिकारी आदि शामिल होंगे। ईसीसीई एजुकेटर के लिए शैक्षिक योग्यता स्नातक गृह विज्ञान मुख्य विषय के साथ 50 फीसदी अंकों के साथ पास हो या नर्सरी अध्यापक शिक्षा, एनटीटी, सीटी नर्सरी, डीपीएसई का दो साल का डिप्लोमा या समकक्ष योग्यता हो। वहीं आवेदक की आयु 40 साल से अधिक नहीं होगी।

10684 की चल रही चयन प्रक्रिया

वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए भी शिक्षा मंत्रालय ने प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालयों में बाल वाटिका के लिए 10684 ईसीसीई एजुकेटर रखने की सहमति व बजट स्वीकृत किया है। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से इनके चयन की भी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इस तरह नए शैक्षिक सत्र में बाल वाटिका को लगभग 20 हजार ईसीसीई एजुकेटर मिल जाएंगे। जो बच्चों की पढ़ाई के लिए बेहतर सहयोग करेंगे।

ये होंगे प्रमुख काम व दायित्व

तीन से छह साल के बच्चों को औपचारिक शिक्षा के लिए तैयार करना

पांच से छह साल के बच्चों पर ध्यान देते हुए निपुण भारत मिशन का लक्ष्य पाना

अभिभावकों के साथ बैठक कर बच्चों की प्रगति से अवगत कराना

बच्चों के विकास से संबंधित इंडीकेटर से संबंधित चाइल्ड प्रोफाइल तैयार करना

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