प्रयागराज, । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बीएचयू के कुलपति को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करने को कहा है कि उन्होंने चार जून 2021 को कार्यकारिणी परिषद के पारित प्रस्ताव के कार्यान्वयन को तीन साल तक क्यों रोके रखा। उसे लागू क्यों नहीं किया गया है। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने बीएचयू के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ सुशील कुमार दुबे की याचिका पर दिया है।
याची को तीन साल पहले कार्यकारी परिषद के प्रस्ताव के बावजूद पदोन्नति लाभ से वंचित किया जा रहा है। उसने पिछली सेवा जोड़ने की कैरियर एडवांस स्कीम के तहत प्रोन्नति की मांग की, जिसे स्वीकार कर उसे असिस्टेंट प्रोफेसर स्टेज दो की प्रोन्नति दी गई। इसके बाद एक मार्च 2019 को याची को असिस्टेंट प्रोफेसर स्टेज तीन की प्रोन्नति दी गई। पर अमल नहीं हुआ।
प्रस्ताव के तीन साल बाद कुलपति ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पत्र का हवाला देते हुए कहा कि पुनर्विचार किए जाने की आवश्यकता है। अधिवक्ता ने कहा कि स्पष्ट किया जाना है कि याची ने लगातार पांच साल की सेवा पूरी की है या नहीं।
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