यूपी बोर्ड के स्कूलों में अनाधिकृत किताबों से पढ़ाई कराने पर प्रधानाचार्य और शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई होगी। बोर्ड ने 2026-27 शैक्षिक सत्र के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी है। एनसीईआरटी किताबों के लिए जारी टेंडर से ही सख्ती शुरू कर दी है।
सचिव भगवती सिंह ने साफ किया है कि यदि कोई प्रकाशक पाठ्यपुस्तकों के प्रकाशन अनुबंध के पहले किताबें छापता है और उससे संबंधित गाइड आदि प्रकाशित करते हुए पाया जाता है तो उसे तीन साल के लिए पाठ्यपुस्तकों के प्रकाशन से वंचित कर दिया जाएगा। इसके अलावा विधिक कार्रवाई भी की जा सकती है। चूंकि इस साल बोर्ड ने अक्तूबर में ही किताबों के प्रकाशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है और एक अप्रैल को नया सत्र शुरू होने से पहले बाजार में कक्षा नौ से 12 तक की एनसीईआरटी की 36 विषयों की 70 पाठ्यपुस्तकों तथा यूपी बोर्ड की हिन्दी, संस्कृत तथा उर्दू विषय की 12 पाठ्यपुस्तकें बिक्री के लिए उपलब्ध हो जाएंगी। पिछले सालों में बोर्ड के स्तर से देरी के कारण अधिकृत और सस्ती किताबें जुलाई तक पहुंच पाती थी और तब तक बच्चे अनाधिकृत महंगी किताबें और गाइड वगैरह खरीद लेते थे।
इस साल समय से प्रक्रिया शुरू होने के कारण बोर्ड ने भी सख्त रुख अपनाया है, ताकि बच्चों को सस्ती और अधिकृत किताबें मिल सकें। सचिव भगवती सिंह का कहना है कि स्कूलों में अधिकृत किताबों से पढ़ाने के निर्देश हैं। यदि किसी स्कूल में अनाधिकृत किताबों से पढ़ाई होते पाई गई तो नियमानुसार कार्रवाई होगी।
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