​राजकीय महाविद्यालयों में प्राचार्यों का टोटा, 216 में सिर्फ 16 ही नियमित – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

primarymaster.in


 

पढ़ाई की गुणवत्ता और छात्रों की संख्या पर पड़ रहा सीधा असर

​प्रयागराज। प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों में लंबे समय से नियमित प्राचार्यों की कमी अब शिक्षा व्यवस्था पर भारी पड़ने लगी है। 216 सरकारी कॉलेजों में मात्र 16 में ही पूर्णकालिक प्राचार्य तैनात हैं जबकि बाकी संस्थान कार्यवाहक व्यवस्था के सहारे चल रहे हैं। इसका असर न सिर्फ पठन-पाठन की गुणवत्ता पर पड़ रहा है बल्कि छात्रों की संख्या में भी लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।

​प्रयागराज मंडल के 13 महाविद्यालयों समेत प्रदेश भर के अधिकांश कॉलेजों में स्थायी प्राचार्य का अभाव है। प्राचार्य पद पर विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की प्रक्रिया वर्षों से लंबित है। यूजी कॉलेजों में 2017 और पीजी कॉलेजों में 2019 के बाद से प्रमोशन नहीं हो सका है। दूसरी ओर कॉलेजों की संख्या भी बढ़ी है। पहले जहां प्रदेश में 171 राजकीय महाविद्यालय थे, वहीं वर्ष 2025 के दौरान करीब 71 नए कॉलेज खोले गए, जिनमें से 46 राजकीय कालेज को पठन-पाठन की जिम्मेदारी दी गई। नए संस्थानों के लिए भी नियमित प्राचार्य की व्यवस्था नहीं हो पाई।

​नियमों के तहत वरिष्ठ प्रोफेसर को प्राचार्य का चार्ज दिया जाना चाहिए लेकिन कई जगहों पर नियमों को दरकिनार कर अन्य को भी प्रभार सौंपा जा रहा है। यहां तक कि निदेशक स्तर पर भी कार्यवाहक व्यवस्था लागू है जिससे प्रशासनिक अस्थिरता साफ नजर आती है। शिक्षकों का मानना है कि कार्यवाहक प्राचार्य प्रभावी निर्णय लेने से बचते हैं। उन्हें यह आशंका रहती है कि स्थायी प्राचार्य की नियुक्ति के बाद उन्हें फिर से अपने ही सहकर्मियों के बीच सामान्य भूमिका में लौटना पड़ेगा। यही वजह है कि अनुशासन और शैक्षणिक गुणवत्ता पर अपेक्षित सख्ती नहीं हो पाती। वर्ष 2022 के बाद से राजकीय महाविद्यालयों में कोई नई भर्ती भी नहीं हुई है, जबकि हर माह दो से तीन प्राचार्य सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

Basic Shiksha Khabar | PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News | Primarykamaster | Updatemarts | Primary Ka Master | Basic Shiksha News | Uptet News | primarykamaster | SHIKSHAMITRA

Leave a Comment