राज्यमंत्री संदीप सिंह ने कहा कि हमने किसी भी विद्यालय को स्थायी रूप से पेयर नहीं किया है। अगर कहीं बैठने की असुविधा होगी या बच्चों की संख्या बढ़ेगी तो पुराने भवन में फिर से संचालन की व्यवस्था की जाएगी। सभी परिषदीय स्कूलों का यू डायस कोड यथावत रहेगा। जहां तक पेयरिंग की बात है तो यह बच्चों को बेहतर वातावरण और संसाधनों से जोड़ने की दिशा में एक ठोस पहल है। अत्यधिक कम नामांकन वाले विद्यालयों में बच्चों को शिक्षा का वास्तविक अनुभव नहीं मिल पाता। कक्षा में संवाद, पियर लर्निंग, समूह कार्य, खेलकूद, प्रोजेक्ट गतिविधियां जैसे जरूरी पहलू प्रभावित होते हैं। जब इन बच्चों को समेकित रूप से पर्याप्त नामांकन वाले विद्यालयों से जोड़ा जाता है, तो उन्हें शिक्षा का पूर्ण वातावरण मिल पाता है।
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बेहतर होगा शिक्षक-छात्र अनुपात: पेयरिंग की प्रक्रिया के माध्यम से प्रत्येक कक्षा के लिए शिक्षक की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी। शिक्षक-छात्र अनुपात बेहतर होगा और शिक्षकों को नवीनतम शिक्षण तकनीकों का उपयोग करने का अवसर मिलेगा। इससे शिक्षण गुणवत्ता बढ़ेगी और बच्चों में आत्मविश्वास व भागीदारी की भावना भी विकसित होगी। पेयरिंग से रिक्त हुए भवनों का भी रचनात्मक उपयोग किया जाएगा। इन भवनों में बालवाटिकाएं और आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किए जाएंगे। मंत्री ने कहा कि शिक्षकों और रसोइयों की भूमिका इस प्रक्रिया में यथावत रहेगी। किसी भी पद को समाप्त नहीं किया जा रहा है बल्कि इस योजना के तहत यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि जहां 50 तक छात्र नामांकित हैं, वहां तीन शिक्षकों की अनिवार्य तैनाती की जाएगी।
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