प्रयागराज। बेसिक शिक्षा परिषद के जिन विद्यालयों में बच्चों की संख्या 151 से कम हैं, वहां से प्रधानाध्यापकों का हटाया जा रहा है। इन विद्यालयों के प्रधानाध्यापक सरप्लस की श्रेणी में आ गए हैं। उनको अब अधिक बच्चों वाले विद्यालयों में भेजने की तैयारी है।
ऐसे 36 प्रधानाध्यापकों को चिह्नित किया गया है। वहीं, कम बच्चे वाले विद्यालयों के वरिष्ठ शिक्षक ही प्रधानाध्यापक का कार्य करेंगे।
परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए तमाम उपाय किए गए। इसके बावजूद कई
समायोजन के दायरे में आ गए हैं 36 प्रधानाध्यापक
विद्यालयों में बच्चों की संख्या काफी कम है। कई विद्यालयों में 50 से भी कम बच्चे पढ़ते हैं।
होलागढ़ के प्राइमरी विद्यालय जमालपुर में 33 बच्चे, चांदपुर सराय भारत में 46 बच्चे, जसरा के पहाड़ी में 33 बच्चे, खेरहट खुर्द में 22 बच्चे, गाजापुर में 39 बच्चे, कौड़िहार के उच्च प्राथमिक विद्यालय ओसा में 30 बच्चे, प्रतापपुर के गोलवा में 29 बच्चे, कंपोजिट विद्यालय पूरेडीह में 39 बच्चे, पटवा में 37 बच्चे, शंकरगढ़ के अमरपुर में चार बच्चे, कंपोजिट विद्यालय करिया कला में 30 बच्चे,
नेवरिया में 29 बच्चे, लखनौती में 32 बच्चे, गरैया लोनीपुर में 34 बच्चे, चंडवा में 37 बच्चे, लक्षमण का पूरा में 29 बच्चे पंजीकृत हैं।
जब बच्चे ही कम हैं तो वहां पर संसाधन ज्यादा देना उचित नहीं है, इसलिए ऐसे विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को अधिक बच्चों वाले विद्यालयों में भेजा जा रहा है, जिससे उनकी उपयोगिता साबित हो सके।
बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेंद्र तिवारी ने बताया कि प्राथमिक विद्यालयों से सरप्लस चिह्नित प्रधानाध्यापकों का जनपदवार पूल बनाया जा रहा है। इसमें कनिष्ठता के क्रम में पहले समायोजन किया जाएगा। यह प्रक्रिया चल रही है
इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र के 666 और शहर के सात शिक्षक सरप्लस हैं। इनकी सूची बीएसए कार्यालय पर चस्पा कर दी गई है।
बीएसए प्रवीण कुमार तिवारी ने बताया कि दो सितंबर सरप्लस शिक्षकों से आपत्ति ली जाएगी। आपत्तियों का निस्तारण तीन और
चार सितंबर को होगा। इसके बाद सरप्लस शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को आवश्यकता वाले 25 विद्यालयों का विकल्प दिया जाएगा। वह विद्यालय की लोकेशन वेबसाइट
https://basiceducation.up.gov.in/hi पर देख सकते हैं।
बढ़ानी पड़ेगी विद्यार्थियों की संख्या शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को सरप्लस से बचना है तो उन्हें विद्यालयों में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए कदम उठाने पड़ेंगे।
अमूमन जिन विद्यालयों में पढ़ाई होती हैं, वहां पर बच्चों को बुलाने की जरूरत नहीं पड़ती है, वह खुद ही आते हैं। जिले के कई विद्यालय इस मामले में नजीर पेश कर रहे हैं। उनमें शिक्षक नियमित उपस्थित रहते हैं और बेहतर पढ़ाई करा रहे हैं। वहीं, जहां पर पढ़ाई प्रति शिक्षक उदासीन और गैरहाजिर रहे हैं, वहां छात्र संख्या कम है।
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