कैदियों के बच्चों को जेल से बाहर स्कूल में शिक्षा का मौलिक अधिकार

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 इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जेल में जन्मे अथवा मां-बाप के साथ कैद में रह रहे बच्चों की स्कूली शिक्षा पर ध्यान के लिए राज्य सरकार को स्कीम तैयार करने का मौका देने के बाद कोर्ट ने 24 अक्टूबर 2024 को फैसला लिखाना शुरू कर दिया। समय की कमी के चलते अंतिम फैसला 20 नवंबर सुनाया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि कैदियों के बच्चों को जेल से बाहर स्कूल में शिक्षा का मौलिक अधिकार है। न्यायमूर्ति अजय भनोट ने कैदी रेखा की जमानत अर्जी की सुनवाई करते हुए सरकार को स्कीम तैयार करने का आदेश दिया था।

याची के साथ रह रहा उसका पांच साल का बच्चा जेल के भीतर कैदियों के बच्चों की शिक्षा के लिए बने स्कूल में पढ़ रहा है। कोर्ट ने

इसे बच्चों के मूल अधिकारों के खिलाफ माना है। कहा कि बच्चों के विकास के लिए जरूरी है उन्हें जेल में न रखा जाय। उन्हें सामान्य बच्चों के साथ शिक्षा दी जाय। कोर्ट ने महानिदेशक कारागार से प्रदेश के जेलों में रह रहे ऐसे बच्चों की बेहतरी की स्कीम तैयार करने को कहा। प्रमुख सचिव महिला एवं बाल विकास व महानिदेशक कारागार उत्तर प्रदेश ने हलफनामा दाखिल कर कहा कि प्रदेश सरकार ऐसे बच्चों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। इस पर कोर्ट ने प्रमुख सचिव महिला एवं बाल विकास, प्रमुख सचिव कारागार व डीजी कारागार को 24 अक्टूबर तक स्कीम पेश करने का समय दिया था। इसके बाद अपना आदेश लिखाना शुरू कर दिया है। शेष आदेश 20 नवंबर को लिखाया जाएगा।

कैदियों के बच्चों को जेल से बाहर स्कूल में शिक्षा का मौलिक अधिकार

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