नई दिल्लीः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) को अल्पसंख्यक संस्थान माना जाएगा या नहीं, इसका जवाब इसी सप्ताह मिल जाएगा। सुप्रीम कोर्ट एएमयू के अल्पसंख्यक दर्जे और उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड की वैधानिकता सहित पांच बड़े मामलों में इसी सप्ताह फैसला सुना सकता है। इन मामलों की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने की थी और फैसला सुरक्षित है। जस्टिस चंद्रचूड़ 10 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। ऐसे में उनकी सेवानिवृत्ति से पहले इन मामलों में फैसला आ जाएगा।
जस्टिस चंद्रचूड़ अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में फैसला देने वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के सेवानिवृत्त होने वाले आखिरी जज हैं। यह संयोग ही है कि उनकी सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले नौ नवंबर को अयोध्या पर आए फैसले को पांच वर्ष पूरे हो जाएंगे। सेवानिवृत्ति से पहले जस्टिस चंद्रचूड़
जिन पांच बड़े मामलों में फैसला सुनाएंगे वे मामले आमजन से जुड़े और सामाजिक व राजनीतिक असर डालने वाले होंगे। इसमें सबसे अहम मामला एएमयू के अल्पसंख्यक दर्जे का है। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली सात सदस्यीय संविधान पीठ ने एएमयू के अल्पसंख्यक दर्जे पर सुनवाई कर एक फरवरी 2024 को फैसला सुरक्षित रख लिया था। दूसरा अहम मामला यूपी मदरसा बोर्ड एक्ट की संवैधानिकता का है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी के मदरसा एक्ट को असंवैधानिक घोषित कर दिया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सुनवाई कर फैसला सुरक्षित रखा हुआ है।
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