मऊ। उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ के तत्वावधान में शिक्षकों ने विभिन्न मांगों को लेकर सोमवार को जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय परिसर में प्रदर्शन किया। साथ ही मुख्यमंत्री को संबोधित जिला विद्यालय निरीक्षक को ज्ञापन सौंपा। कहा कि सेवा सुरक्षा समाप्त होने से शिक्षक चिंतित हैं।
इस मौके पर संगठन के जिलाध्यक्ष जयराम यादव ने कहा कि उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम 2023 लागू होने से उप्र माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम 1982 निरस्त हो गया है। इसके कारण शिक्षकों की सेवा सुरक्षा की धारा-21 अप्रभावी हो गई है। सेवा सुरक्षा समाप्त होने से पूरे प्रदेश के शिक्षक चिंतित हैं। विभिन्न जनपदों में मनमाने तरीके से शिक्षकों के निलंबन और बर्खास्तगी की घटनाएं सामने आ रही हैं। शिक्षक दबाव में ठीक तरह से कार्य नहीं कर पा रहे हैं। शिक्षकों को सेवा सुरक्षा प्रदान करने के लिए अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों का राजकीयकरण किया जाए। जिलामंत्री देवानंद ने कहा कि उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम 2023 लागू होने के कारण उप्र माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम 1982 निरस्त किया गया है। इसके कारण सहायक अध्यापक से प्रवक्ता पद पर पदोन्नति प्रक्रिया पूरे प्रदेश में गत 16 माह से बंद है। मांग की कि जिस प्रकार अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों का चयन प्रदेश स्तर पर होता रहा है, उसी प्रकार पदोन्नति भी प्रदेश स्तर पर की जाए। सभी कार्यालयों में सिटीजन चार्टर लागू करते हुए फ्लैक्स लगवाया जाए। मामले पर अविलंब विचार नहीं किया गया तो 10 फरवरी 2025 को शिक्षा निदेशालय (माध्यमिक) लखनऊ का घेराव करेंगे। इस मौके पर लालमणि यादव, श्रीराम बरनवाल, रवि प्रकाश यादव, प्रदीप यादव, अशोक पांडेय, सुरेश कुमार, रमेश चंद वर्मा, रमेश चंद राम, राम विजय यादव आदि शिक्षक मौजूद रहे।
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