लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कोरोना काल में चुनाव ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले कई सरकारी कर्मियों के परिजनों को 30 लाख की अनुग्रह राशि न दिए जाने पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि उन्हें यह अनुग्रह राशि कितने समय में दी जाएगी। कोर्ट ऐसे मामलों का गंभीर संज्ञान लेकर अपर मुख्य सचिव पंचायती राज को तीन सप्ताह में निजी जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया।
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि 13 जनवरी तक अनुग्रह राशि का मृतक कर्मियों के परिजनों को भुगतान करने का भी निर्देश दिया। कोर्ट ने अनुग्रह राशि भुगतान में हीलाहवाली करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की राज्य सरकार को छूट भी दी है। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि प्रदेश में ऐसे कितने मामले लंबित हैं, जिनमें अबतक अनुग्रह राशि नहीं दी गई है।
न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन की एकल पीठ ने यह आदेश एक मृतक कर्मी की पत्नी उषा देवी की याचिका पर दिया। याची का कहना था कि उसके पति की मृत्यु कोविड काल में चुनाव ड्यूटी के दौरान हो गई थी। बस्ती के डीएम ने 30 लाख रुपये अनुग्रह राशि देने की सिफारिश की थी। इसके बावजूद अभी तक रकम नहीं दी गई। कोर्ट ने डीएम की सिफारिश के 9 माह बाद भी राशि का भुगतान न किए जाने को राज्य की शोचनीय स्थिति कहा था और एसीएस पंचायतीराज को निजी जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था।
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