गांवों के नाम पर मदरसे फाइलों में ही दी तालीम

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 गोंडा : डकार लिया मानदेय, जांच में उजागर हुआ सच

गोंडा। नेपाल सीमा से सटे देवीपाटन मंडल में मदरसों के नाम पर बड़ा खेल चल रहा है। मंडल मुख्यालय गोंडा में तो लापरवाही की हद हो गई। मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत फाइलों में गांव के नाम पर मदरसे संचालित कर दिए गए। शिक्षकों को मानदेय भी बांट दिए गए, लेकिन अब इसका रिकॉर्ड ही नहीं मिल रहा है।

मदरसों का जीपीएस लोकेशन भी नहीं उपलब्ध है। विवरण खोजते हुए जांच टीम जब गांव पहुंची तो ग्रामीण दंग रह गए। वजह, जिस मदरसे के बारे में टीम जानकारी जुटा रही थी उस मदरसे का तो उन्होंने कभी नाम ही नहीं सुना था। जिले के 100 से अधिक गांवों में टीम गई, जहां मदरसे मिले ही नहीं। ऐसे में किसे कितना मानदेय दिया गया और मदरसे का संचालन कब से हो रहा है कि जानकारी किसी के पास नहीं है। खेल में शामिल जिला अल्पसंख्यक कल्याण कार्यालय में तैनात लिपिक

शमीम अहमद का वर्ष 2018 में एटा तबादला कर दिया गया था। शमीम ने न यहां का चार्ज किसी को सौंपा और न ही एटा में कार्यभार ग्रहण किया। वर्तमान में उसके निलंबित होने की जानकारी सामने आई है। बीते सात वर्ष से उसका कुछ पता नहीं है।

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के कनिष्ठ सहायक हेमंत पांडेय ने 20 मार्च 2024 को कोतवाली नगर में वरिष्ठ सहायक शमीम अहमद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। तब भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने विभाग से रिकॉर्ड मांगा तो आनन फानन में कार्यालय के कर्मियों से लिखित बयान लिया गया, जिसमें सभी ने शमीम अहमद के चार्ज न देने की बात कही। विवेचक रोडवेज चौकी प्रभारी डीपी गौतम का कहना है कि पहले वाले विवेचक का तबादला हो गया था। अब जांच उन्हें मिली है।

गांवों के नाम पर मदरसे फाइलों में ही दी तालीम

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