नई दिल्ली। वैश्विक अनिश्चितता और विकास में नरमी के बीच भारत में इस साल वेतन में औसतन 9.2 प्रतिशत की वृद्धि होगी। पिछले साल यह 9.3 प्रतिशत थी। पेशेवर सेवा फर्म एओन पीएलसी ने कहा, भारत एक स्थिर विकास की गाथा के लिए तैयार है। 2025 में देश में वेतन वृद्धि स्थिर होने की उम्मीद है।
45 उद्योगों की 1,400 से अधिक कंपनियों के अध्ययन से पता चलता है कि कंपनियों में नौकरी छोड़ने की दर अब कम हो रही है। 2022 के बाद से वेतन वृद्धि में गिरावट का
चलन रहा है। इससे बचने के लिए कंपनियों ने तब वेतन में औसतन 10.6 फीसदी का इजाफा किया था। 2023 में 18.7 प्रतिशत और 2022
में 21.4 प्रतिशत कर्मचारियों ने संबंधित कंपनियों से इस्तीफा दिया था। हालांकि, 2024 में घटकर यह दर 17.7 प्रतिशत रह गई।
रिपोर्ट के अनुसार, अनुमानित वेतन वृद्धि में गिरावट का रुझान देशों के बीच तनाव और आर्थिक विकास, अमेरिकी व्यापार नीतियों के संभावित प्रभाव, मध्य पूर्व में संघर्ष और अन्य कारणों से हो सकता है। हालाँकि, भारत की आर्थिक संभावनाएं स्थिर बनी हुई हैं। ग्रामीण मांग में सुधार हो रहा है। निजी खपत में गति बनी हुई है। इंजीनियरिंग डिजाइन सेवाओं और ऑटो विनिर्माण में वेतन वृद्धि सबसे अधिक 10.2 प्रतिशत होगी। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में 10 प्रतिशत की वृद्धि होगी।
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