लखनऊ। राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए पिछले साल से नियम कड़े कर दिए गए हैं। इसकी वजह से बार-बार तिथि बढ़ाने के बाद भी आवेदन अपेक्षाकृत कम हो रहे हैं। अब भी तीन जिलों से एक-एक, नौ जिले से दो-दो और 12 जिलों से तीन-तीन आवेदन ही हुए हैं। इसे देखते हुए एक बार फिर आवेदन तिथि 10 मार्च तक बढ़ा दी गई है।
शिक्षकों ने बताया कि राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए शिक्षक के शिक्षण अनुभव को पांच से बढ़ाकर 15 साल कर दिया गया है। वहीं प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक के लिए न्यूनतम छात्र संख्या 150, उच्च प्राथमिक के लिए 105 और कंपोजिट स्कूल के लिए 255 कर दी गई है। इस बदलाव के कारण बहुत से शिक्षक
आवेदन से वंचित हो रहे हैं। वहीं काफी संख्या में युवा और नवाचार करने वाले शिक्षक भी आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब राष्ट्रीय अध्यापक पुरस्कार के लिए शिक्षण अनुभव 10 साल है तो राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए 15 साल क्यों किया गया है। यदि अनुभव का साल बढ़ाना था तो 5 की जगह 7-8 किया जा सकता था।
बेसिक शिक्षा विभाग के उप शिक्षा निदेशक संजय कुमार उपाध्याय ने सभी जिलों के बीएसए को पत्र भेजकर कहा है कि कम आवेदन की स्थिति काफी खेदजनक है। उन्होंने कहा है कि अपने-अपने जिले से योग्य शिक्षकों के कम से कम चार-चार आवेदन कराना सुनिश्चित करें।
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