प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि 30 साल पहले सृजित किसी पद के लिए मंजूरी को केवल इस आधार पर वापस नहीं लिया जा सकता कि उसे सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्वीकृत नहीं किया गया था। ऐसे पद पर कार्यरत व्यक्ति को 30 साल तक लगातार काम करने और धोखाधड़ी या कदाचार के आरोपों के बिना भुगतान किए जाने के बाद वेतन से वंचित नहीं किया जा सकता। यह टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की पीठ ने शफीक अहमद की याचिका पर वेतन रोकने का आदेश रद्द कर दिया।
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