अमेठी सिटी। प्रधानाचार्य को विद्यालय के समय सदैव सक्रिय रहना चाहिए। उसमें चाक, टाक व वाक के गुण होना चाहिए। ये बातें रविवार को जन शिक्षा समिति काशी प्रदेश की ओर से आयोजित 10 दिवसीय प्रधानाचार्य प्रशिक्षण वर्ग को संबोधित करते हुए पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय सह संगठन मंत्री डॉ. राम मनोहर ने कहीं।
उन्होंने आचार्य विकास में प्रधानाचार्य की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रधानाचार्य आचार्य का प्रधान होता है। जिस विद्यालय में छात्र-छात्राएं 75 फीसदी से अधिक अंक पाएं, वही सफल प्रधानाचार्य माना जाता है। प्रधानाचार्य अपने आदर्श
गुणों को अपने आचार्य व विद्यार्थियों में समाहित करने वाला अच्छा प्रधानाचार्य होता है। हमारे विद्यालय स्ववित्त पोषित नहीं, बल्कि समाज पोषित विद्यालय हैं।
उन्होंने आचार्य के विकास में प्रधानाचार्य की भूमिका पर अपना विषय रखते हुए कि प्रधानाचार्य का दायित्व आचार्य का शैक्षिक विकास, आचार्य का अभिलेखीय विकास, आचार्य का बहुआयामी विकास, प्रशासनिक विकास व सामाजिक विकास करना है। प्रधानाचार्य को अपने सहयोगियों पर विश्वास करना चाहिए, क्योंकि विश्वास में ही विकास है। इस दौरान काशी संभाग निरीक्षक वीरेंद्र सिंह, प्रांत प्रचार प्रमुख काशी संतोष मिश्र आदि मौजूद रहे।
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