● शिक्षकों ने रोती हुई रसोइयों, बच्चों के वीडियो एक्स पर डाले
● देश भर में ट्रेंड हुआ मुद्दा, विलय के विरोध में बुलंद की आवाज
लखनऊ, कार्यालय संवाददाता। 10 हजार प्राइमरी स्कूलों के विलय के खिलाफ रविवार को डिजिटल प्रोटेस्ट के तहत मधुशाला नहीं पाठशाला चाहिए का एक्स हैंडिल पर अभियान चलाया गया। प्रदेश भर के शिक्षक, शिक्षामित्र, डीएलएड अभ्यर्थियों ने एक्स पर भारी संख्या में ट्वीट किये। शिक्षकों ने ट्वीट में रोती हुई रसोइयों, बच्चों के वीडियो पोस्ट किये। दूरी बढ़ने से स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों के अभिभावकों का दर्द बयां किया। शिक्षकों ने ट्वीट कर स्कूलों में शिक्षकों की उचित संख्या, बुनियादी सुविधाओं की मांग उठायी। अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष व उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडे का कहना है कि स्कूल विलय होने से डीएलएड और बीटीसी प्रशिक्षित अभ्यर्थी भविष्य के प्रति चिंतित हैं। अभिभावक बच्चों की शिक्षा के लिए संघर्षरत हैं। बताया कि सरकार को बच्चों, अभिभावक, शिक्षक और प्रशिक्षुओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए स्कूल विलय संबंधी अव्यावहारिक आदेश निरस्त करना चाहिए। अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु का कहना है कि सरकार का बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ नारे का क्या होगा? क्योंकि स्कूलों का विलय करने से सबसे ज्यादा असर इन्हीं बेटियों पर पढ़ रहा है।
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