टीईटी के लिए परीक्षा पाठ्यक्रम तैयार पोर्टल का परीक्षण अंतिम दौर में – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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 प्रयागराज उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। परीक्षा पाठ्यक्रम तैयार कराकर विशेषज्ञों के माध्यम से उसका माडरेशन भी पूरा करा लिया गया है। अब आनलाइन आवेदन प्रक्रिया के लिए एनआइसी द्वारा विकसित किए गए साफ्टवेयर/पोर्टल का परीक्षण किया जा रहा है। त्रुटि मिलने पर टेक्निकल आडिट कराने के साथ उसे जल्द अंतिम रूप देकर आयोग विज्ञापन जारी करने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

मंगलवार को आयोग के अध्यक्ष डा. प्रशांत कुमार की अध्यक्षता में हुई साप्ताहिक बैठक में एडेड माध्यमिक शिक्षकों की सेवा सुरक्षा की धारा के संबंध में प्रस्ताव को लेकर चर्चा की गई। इसके अलावा कुछ विभागीय मुद्दों पर विचार विमर्श के साथ टीईटी आयोजन से जुड़ी तैयारियों की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि परीक्षा पाठ्यक्रम संबंधी कार्य पूर्ण करा लिया गया है। आवेदन के लिए विकसित किए गए पोर्टल का परीक्षण किया जा रहा है। जल्द ही इसे अंतिम रूप देकर लाइव करने और टीईटी विज्ञापन का नोटिफिकेशन जारी किए जाने पर निर्णय लिया जाएगा। विज्ञापन के साथ ही परीक्षा योजना और विस्तृत पाठ्‌यक्रम भी सार्वजनिक किया जाएगा, जिससे अभ्यर्थियों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके। आयोग की ओर से टीईटी के आयोजन की तिथि दो, तीन एवं चार जुलाई प्रस्तावित है। चार वर्ष से टीईटी की अधिसूचना का इंतजार कर रहे उम्मीदवार विज्ञापन जारी किए जाने की प्रतीक्षा में हैं।

सेवारत शिक्षकों ने मांगी आयु और

न्यूनतम अंक में छूट: बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में नियुक्त उन

शिक्षकों को भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश से टीईटी उत्तीर्ण होना अनिवार्य है, जो बिना टीईटी के नियुक्त हैं। ऐसे शिक्षकों की संख्या प्रदेश में करीब 1.86 लाख है। उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के संबंध में जब तक सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय नहीं आता, तब तक वह टीईटी की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है

कि सेवारत शिक्षकों की चिंता को ध्यान में रखकर प्रस्तावित टीईटी में उम्र सीमा में छूट तथा पास होने के लिए न्यूनतम अंक पूर्णांक का 50 प्रतिशत निर्धारित किया जाए। इसका कारण भी बताया है कि अधिकांश शिक्षक 50 से 55 वर्ष या इससे ऊपर के हैं तथा उन्हें विद्यालय में शिक्षण कार्य के साथ शासन की अन्य योजनाओं में अक्सर ड्यूटी होने से तैयारी का समय नहीं मिल पाता है।

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