प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि कोई महिला, जिसने सरकारी स्कूल शिक्षक के तौर पर नियुक्त होने से पहले दूसरी शादी की थी, उसे इस आधार पर यूपी सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली और यूपी सरकारी कर्मचारी (अनुशासन और अपील) नियमावली के तहत अनुचित आचरण के लिए दंडित नहीं किया जा सकता।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि वह उम्मीदवार, जिसने 2009 में ऐसे व्यक्ति से शादी की, जिसकी पहली शादी अभी भी कायम थी, वह ‘उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा शिक्षक सेवा नियमावली, 1981’ के नियम 12 के तहत टीचर के तौर पर नियुक्ति के लिए अयोग्य मानी जाएगी, क्योंकि यह कमी नियुक्ति की जड़ पर ही वार करती है,
जिससे नियुक्ति शुरू से ही अमान्य हो जाती है।
याचिकाकर्ता रीना की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने कहा कि मौजूदा मामले में याचिकाकर्ता, जिसकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं, उन्होंने 2009 में एक ऐसे व्यक्ति से शादी की थी, जब उसकी किसी दूसरी महिला के साथ पहली शादी अब भी कायम थी, जबकि याचिकाकर्ता को असिस्टेंट टीचर के तौर पर 2015 में ही नियुक्त किया गया। इसके बाद कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 का नियम 29 सरकारी कर्मचारी के सेवाकाल के दौरान के आचरण पर लागू होता है। सरकारी सेवा में आने से पहले किए गए कार्य या चूंकि उक्त नियम के दायरे में नहीं आतीं।
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