संविदाकर्मियों को स्थायी के समान वेतन का अधिकार नहीं : सुप्रीम कोर्ट – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

primarymaster.in


उच्चतम न्यायालय ने गेस्ट लेक्चरर्स को नियमित असिस्टेंट प्रोफेसरों के समान वेतन देने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि संविदा पर नियुक्त कर्मी स्थायी कर्मचारियों के समान वेतन पाने के अधिकारी नहीं हैं। न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति पीवी संजय कुमार की पीठ ने केरल उच्च न्यायालय के एक फैसले को रद्द करते हुए यह निर्णय दिया।

उच्च न्यायालय खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि विश्वविद्यालयों द्वारा गेस्ट लेक्चरर्स से लंबे समय तक काम लेना शोषण के समान है और उन्हें नियमित असिस्टेंट प्रोफेसरों के बराबर वेतन दिया जाना चाहिए। हालांकि, उच्च न्यायालय ने यह भी माना था कि वे नियमितीकरण के पात्र नहीं हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के इस फैसले को कानून के अनुरूप नहीं माना। शीर्ष अदालत ने कहा कि गेस्ट लेक्चरर्स और नियमित शिक्षकों के कार्य, उत्तरदायित्व और नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी तरह अलग होती है, इसलिए दोनों की तुलना नहीं की जा सकती।

कोर्ट ने यह भी पाया कि याचिकाकर्ताओं ने अपनी मूल याचिका में वेतन समानता की मांग ही नहीं की थी, इसके बावजूद उच्च न्यायालय ने यह राहत दे दी, जो न्यायिक प्रक्रिया के सिद्धांतों के विपरीत है।

यूजीसी नियमों का हवाला

न्यायालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के 2010 के दिशानिर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि गेस्ट फैकल्टी के लिए अधिकतम मानदेय 50 हजार रुपये प्रति माह निर्धारित है। इसलिए इससे अधिक वेतन देने का कोई वैधानिक आधार नहीं बनता।

पांच वर्ष का बकाया भुगतान

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जो शिक्षक वर्षों तक नियमित रूप से काम करते रहे हैं, वे केवल सेवा के आधार पर नियमितीकरण या समान वेतन का दावा नहीं कर सकते। सुप्रीम कोर्ट ने श्री शंकराचार्य यूनिवर्सिटी ऑफ संस्कृत को आदेश दिया कि वह गेस्ट लेक्चरर्स को 50 हजार रुपये प्रति माह के हिसाब से मानदेय का भुगतान करे। यह राशि उनकी सेवा समाप्ति से ठीक पहले के पांच वर्षों की अवधि के लिए देनी होगी।

Basic Shiksha Khabar | PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News | Primarykamaster | Updatemarts | Primary Ka Master | Basic Shiksha News | Uptet News | primarykamaster | SHIKSHAMITRA

Leave a Comment