इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि अनुदानित संस्थानों में कार्यरत कार्यवाहक प्रधानाचार्यों को किसी अतिरिक्त राहत के बिना नियमित प्रधानाचार्य के समान वेतन पाने के हकदार हैं। कोर्ट ने कहा कि नियमित प्रधानाचार्य की नियुक्ति तक उन्हें कार्य करने का अधिकार है, लेकिन नियमित नियुक्ति के बाद उन्हें हटना होगा।
यह आदेश न्यायमूर्ति सीमांत सिंघल और न्यायमूर्ति स्वर्णम चतुर्वेदी की खंडपीठ ने पांच विशेष अपीलों को स्वीकार करते हुए दिया है। तीन मामलों में पद पर वेतन भुगतान का आदेश दिया गया है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि अपीलकर्ताओं को तब तक पद पर बने रहना होगा, जब तक नियमित नियुक्ति नहीं हो जाती। कोर्ट ने धनेश्वर सिंह चौहान बनाम डीआईओएस, नमकश्वर मिश्र बनाम डीआईओएस, सीतामऊ सहित अन्य मामलों के निर्णयों का हवाला दिया।
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