यूपी कैबिनेट: शिक्षामित्रों का मानदेय लगभग दोगुना हुआ, 25 लाख युवाओं को दिए जाएंगे टैबलेट; पढ़ें 22 बड़े फैसले – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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 उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक में 22 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी मिल गई। सरकार ने शिक्षामित्रों और अनुदेशकों का मानदेय लगभग दोगुना कर दिया है।  यूपी के 52 जनपदों में परिवहन सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए पीपीपी मॉडल पर आधुनिक बस अड्डों के निर्माण का रास्ता साफ कर दिया है।

इसके अलावा बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर, संत रविदास, कबीर, ज्योतिबा फुले, महर्षि वाल्मीकि समेत अन्य महापुरुषों की मूर्तियों का व्यापक सौंदर्यीकरण होगा। वहीं, स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत युवाओं को निःशुल्क वितरण के लिए 25 लाख टैबलेट खरीदने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई। पढ़ें बड़े फैसले…

शिक्षामित्रों व अनुदेशकों को बढ़ा हुआ मानदेय मई के भुगतान में

प्रदेश सरकार ने 1.43 लाख शिक्षामित्रों व 24 हजार अनुदेशकों का नौ साल का सूखा खत्म किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में शिक्षामित्रों व अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि को स्वीकृति दी गई। यह अप्रैल से लागू होगा और मई के भुगतान में इनको बढ़ा हुआ मानदेय मिलेगा।

कैबिनेट के निर्णय की जानकारी देते हुए बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने बताया कि 2017 में 10 हजार रुपये निर्धारित किए गए शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाकर अब 18 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। वहीं अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय 9000 से बढ़ाकर 17 हजार रुपये प्रतिमाह किया गया है। बढ़ा हुआ मानदेय एक अप्रैल से प्रभावी होगा और मई में होने वाले वेतन भुगतान में यह बढ़कर आएगा।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 1,42,929 शिक्षामित्र कार्यरत हैं। इनमें से 1,29,332 शिक्षामित्रों का मानदेय अब तक समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत केंद्र व राज्य सरकार के 60:40 अनुपात में मिलता रहा है। मानदेय वृद्धि के बाद इन पर आने वाला 1138.12 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय प्रदेश सरकार वहन करेगी। शेष 13,597 शिक्षामित्र, जिनका मानदेय भुगतान पूरी तरह से राज्य सरकार द्वारा किया जाता है। उनके लिए 119.65 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय भार भी राज्य सरकार वहन करेगी।

संदीप सिंह ने बताया कि प्रदेश के 13,769 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में वर्तमान में 24,717 अंशकालिक अनुदेशक कार्यरत हैं। मानदेय वृद्धि के निर्णय से इनको भी बड़ी राहत मिलेगी। इस पर 217.50 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय भार प्रदेश सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल शिक्षामित्रों व अंशकालिक अनुदेशकों के जीवन स्तर में सुधार लाएगा, बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाएगा।

सामाजिक न्याय के प्रणेताओं के स्मारकों का सरकार करेगी संरक्षण

उत्तर प्रदेश में महापुरुषों की विरासत को सहेजने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए योगी सरकार ने हर विधानसभा क्षेत्र में 10 स्मारकों के विकास का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में ‘डा० बी०आर० आंबेडकर मूर्ति विकास योजना’ को स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके तहत महापुरुषों, समाज सुधारकों और सांस्कृतिक विभूतियों की मूर्तियों का संरक्षण, सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। 

इसके अंतर्गत योगी सरकार बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के साथ-साथ संत रविदास, कबीर, ज्योतिबा फुले, महर्षि वाल्मीकि समेत अन्य महापुरुषों की मूर्तियों का व्यापक सौंदर्यीकरण करेगी। 

इसके साथ ही आगामी 14 अप्रैल को प्रदेश की सभी विधानसभा क्षेत्रों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यहां स्थानीय जनप्रतिनिधि (सांसद, विधायक, एमएलसी) जनता को इस योजना और चयनित स्थलों के बारे में जानकारी भी देंगे।

हर विधानसभा क्षेत्र में 10 स्मारक, 403 करोड़ का प्रावधान

यह पहल न केवल ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित करेगी, बल्कि उन्हें जनोपयोगी केंद्र के रूप में भी विकसित करेगी। समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने बताया कि योजना के तहत प्रदेश के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में 10-10 स्मारकों का विकास किया जाएगा।

प्रति स्मारक 10 लाख रुपये की लागत तय की गई है। इसके अंतर्गत कुल 403 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इन स्मारकों के आसपास बाउंड्रीवॉल, छत्र निर्माण, सौंदर्यीकरण, हरियाली का विकास और प्रकाश व्यवस्था की जाएगी।

सांस्कृतिक धरोहर के साथ रोजगार सृजन भी

योजना का उद्देश्य सिर्फ मूर्तियों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके आसपास के क्षेत्रों को विकसित कर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित करना है। निर्माण कार्यों के जरिए ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

जन जागरूकता और विरासत संरक्षण को बढ़ावा

योगी सरकार की यह पहल मूर्ति स्थलों को केवल प्रतीकात्मक स्थान न बनाकर उन्हें जानकारीपरक और जन उपयोगी केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे नई पीढ़ी को महापुरुषों के योगदान के बारे में जानने और उनसे प्रेरणा लेने का अवसर मिलेगा। इसके अंतर्गत 31 दिसम्बर, 2025 तक स्थापित मूर्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर उनके आसपास के क्षेत्र का सर्वांगीण विकास किया जाएगा।

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यूपी कैबिनेट बैठक – फोटो : अमर उजाला

8 साल में पूरी करनी होगी परियोजना

प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि परियोजना के तहत बस स्टेशनों को अत्याधुनिक स्वरूप दिया जाएगा, जहां यात्रियों को शॉपिंग मॉल, सिनेमाघर, बेहतर प्रतीक्षालय, स्वच्छता एवं अन्य आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

निवेशकों को आकर्षित करने के लिए पात्रता शर्तों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। तकनीकी क्षमता की शर्त को परियोजना लागत के 150% से घटाकर 100% किया गया है, वहीं परियोजनाओं को पूरा करने की समय सीमा 5 से बढ़ाकर 8 वर्ष कर दी गई है। नेट वर्थ की अनिवार्यता परियोजना लागत का 25% निर्धारित की गई है तथा कंसोर्टियम में सदस्यों की अधिकतम संख्या 3 से बढ़ाकर 4 कर दी गई है।

12 माह में शुरू करना होगा काम

सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने पर परियोजना का काम शुरू करने की समय सीमा भी 6 माह से बढ़ाकर 12 माह कर दी गई है। निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए सभी स्थलों पर 2.5 फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) और ग्राउंड कवरेज की निःशुल्क अनुमति देने का प्रस्ताव है।

लीज अवधि 35 या 90 वर्ष निर्धारित की गई है और इसके समाप्त होने पर स्वामित्व स्वतः ही उत्तर प्रदेश स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन को प्राप्त हो जाएगा। कैबिनेट ने यह भी निर्णय लिया है कि बिडिंग प्रक्रिया के दौरान यदि किसी संशोधन की आवश्यकता होती है, तो उसके लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया जाएगा। 

4000 करोड़ से अधिक निवेश आने का अनुमान

परिवहन मंत्री ने बताया कि इस योजना के प्रथम चरण में 23 बस स्टेशनों (लखनऊ, कानपुर, आगरा सहित) को पहले ही स्वीकृति दी जा चुकी है और द्वितीय चरण के 49 बस अड्डों के साथ अब कुल 52 जनपद इस योजना से आच्छादित हो जाएंगे, जबकि शेष 23 जनपदों को अगले चरण में शामिल किया जाएगा। 

परियोजना में ₹4000 करोड़ से अधिक निवेश आने का अनुमान है (पहले चरण में लगभग ₹2500 करोड़), जिसके तहत बस अड्डों को एयरपोर्ट की तर्ज पर विकसित करते हुए वीआईपी लाउंज, रेस्टोरेंट, शॉपिंग मॉल, सिनेमा हॉल और ठहरने की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। कुल क्षेत्रफल का लगभग 55% हिस्सा सार्वजनिक सुविधाओं और 45% व्यावसायिक गतिविधियों के लिए उपयोग होगा। 

तीन जनपदों में बस स्टेशन निर्माण हेतु निःशुल्क भूमि हस्तांतरण को मंजूरी

परिवहन मंत्री ने बताया कि कैबिनेट में मंजूर किए गए अन्य प्रस्तावों के तहत सिकंदराराऊ (हाथरस), नरौरा (बुलंदशहर) और तुलसीपुर (बलरामपुर) में नए बस अड्डों के निर्माण हेतु निःशुल्क भूमि हस्तांतरण को मंजूरी दी गई है। परियोजना के तहत निर्माण कार्य दो वर्षों में पूरा करने तथा व्यावसायिक गतिविधियों को सात वर्षों में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। 

वर्तमान में प्रतिदिन 15 से 23 लाख यात्री परिवहन सेवाओं का उपयोग करते हैं, जो त्योहारों के दौरान 30 से 35 लाख तक पहुंच जाते हैं, ऐसे में यह योजना यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के साथ ही शहरी भीड़भाड़ कम करने में भी सहायक होगी।

नरौरा में बस स्टेशन के साथ डिपो कार्यशाला स्थापित की जाएगी, जबकि तुलसीपुर में देवीपाटन मंदिर के निकट यात्रियों की सुविधा के लिए आधुनिक बस स्टेशन का निर्माण होगा। इन बस स्टेशनों को आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां दुकानों और फूड कोर्ट जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।

गोरखपुर में वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय को कैबिनेट की मंजूरी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई प्रदेश कैबिनेट की बैठक में गोरखपुर में बनने वाले ‘उत्तर प्रदेश वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय’ को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने इसके लिए “उत्तर प्रदेश वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय अध्यादेश-2026” के प्रख्यापन को स्वीकृति प्रदान की है।

491 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से यह विश्वविद्यालय कैम्पियरगंज क्षेत्र में लगभग 50 हेक्टेयर भूमि पर स्थापित किया जाएगा। योगी सरकार वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय के लिए इस वर्ष प्रस्तुत प्रदेश के बजट में भी 50 करोड़ रुपये पास कर चुकी है। 

गोरखपुर के इस पांचवें विश्वविद्यालय में वानिकी, औद्यानिकी, वन्य जीव संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, एग्रोफॉरेस्ट्री, फल एवं बागवानी सहित कई आधुनिक विषयों में बीएससी, एमएससी, पीएचडी और डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे।

इसका उद्देश्य वनावरण बढ़ाना, जैव विविधता संरक्षण को मजबूत करना, किसानों और छात्रों को आधुनिक प्रशिक्षण देना तथा कृषि और पर्यावरण के क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देना है। इस फैसले से प्रदेश में हरित विकास, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय की स्थापना के साथ ही वन एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए योगी सरकार और गोरखपुर के नाम एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज हो जाएगी। इसके पहले सरकार ने दुनिया के पहले राजगिद्ध (जटायु) संरक्षण केंद्र की स्थापना गोरखपुर में ही की है। 

6 सितंबर 2024 को कैम्पियरगंज में दुनिया के पहले राजगिद्ध जटायु (रेड हेडेड वल्चर) संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र के उद्घाटन अवसर पर सीएम योगी ने जटायु संरक्षण केंद्र के समीप ही वानिकी विश्वविद्यालय खोलने की घोषणा की थी। अब इसे कैबिनेट की भी मंजूरी मिल गई है।

यह उत्तर भारत का पहला और पूरे देश का दूसरा वानिकी विश्वविद्यालय होगा। इस विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए गोरखपुर वन प्रभाग ने जटायु संरक्षण केंद्र के समीप ही 50 हेक्टेयर भूमि चिह्नित कर प्रक्रियात्मक तैयारी तेज कर दी है। 

गोरखपुर के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) विकास यादव का कहना है कि वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय में वानिकी के अलावा कृषि वानिकी, सामाजिक वानिकी और औद्यानिक के भी डिग्री और डिप्लोमा कोर्स संचालित कराने की योजना है ताकि बड़ी संख्या में युवाओं के सामने नौकरी और रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध हो सकें। उन्होंने बताया कि कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब शिलान्यास की तैयारी और तेज की जाएगी।

ग्रेटर नोएडा में मेट्रो विश्वविद्यालय को हरी झंडी

ग्रेटर नोएडा में निजी क्षेत्र के अंतर्गत मेट्रो विश्वविद्यालय की स्थापना को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इससे इस क्षेत्र में उच्च शिक्षा के इच्छुक युवाओं को पढ़ाई के बेहतर अवसर मिलेंगे। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम 2019 के प्रावधानों के अंतर्गत यह निर्णय लिया गया है।

प्रायोजक संस्था सनहिल हेल्थकेयर प्राइवेट लिमटेड, नोएडा द्वारा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से आवंटित 26.1 एकड़ भूमि पर मेट्रो विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था। इसे परीक्षण के बाद स्वीकृति दी गई है।

इसके लिए उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम 2019 की अनुसूची में संशोधन करते हुए प्रायोजक संस्था को संचालन प्राधिकार पत्र जारी करने का निर्णय लिया गया है। उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना से उच्च शिक्षा के नए अवसर मिलेंगे। युवाओं को आधुनिक व रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध कराई जा सकेगी। नए विश्वविद्यालयों की स्थापना से प्रदेश में शिक्षा के साथ-साथ रोजगार और कौशल विकास के अवसर भी बढ़ेंगे।

कोटेदारों से खाली बोरे खरीदने की मिली अनुमति

कैबिनेट ने गेहूं खरीद के लिए उचित दर विक्रेताओं के पास उपलब्ध पीडीएस से खाली बोरों को सीधे खरीदने की अनुमति खाद्य विभाग को दे दी है। अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के चलते बोरों की आपूर्ति बाधित हुई है। साथ ही बाजार भाव भी बढ़ गए हैं।

इसलिए ई टेंडर और जेम से ही खरीद की शर्त में छूट देते हुए उचित दर विक्रेताओं के पास उपलब्ध पीडीएस से खाली यूज्ड बोरों की खरीद का फैसला किया गया है। इससे उचित दर विक्रेताओं से सीधे 20-25 हजार गांठ जूट बोरे तत्काल उपलब्ध हो सकेंगे और गेहूं खरीद का काम प्रभावित नहीं होगा।

 

भारत या पाक विभाजन के समय आए शरणार्थियों को मिला जमीन पर हक

कैबिनेट ने भारत या पाकिस्तान विभाजन के समय विस्थापित होकर आए शरणार्थियों को दी गई जमीन पर उन्हें मालिकाना हक दिए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इससे दशकों बाद 12380 शरणार्थी परिवारों को राहत मिली है। उन्हें आसानी से बैंक लोन मिल सकेगा। साथ ही वे अपनी उपज को सरकारी खरीद केंद्रों पर भी बेच सकेंगे।

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि इस फैसले से अपनी जमीन पर अतिक्रमणकारी कहे जाने वाले विस्थापित परिवारों को भूमिधर होने का सम्मान मिल सकेगा। राजस्व संहिता में यह संशोधन कर प्रदेश सरकार ने अंत्योदय के संकल्प को सिद्ध किया है। इस निर्णय से मुख्य रूप से भारत-पाकिस्तान के विभाजन के समय विस्थापित होकर आए और पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, रामपुर व बिजनौर में बसाए गए शरणार्थी परिवारों को लाभ मिलेगा।

पिछले 50-70 वर्षों से स्वामित्व के अभाव में इन परिवारों को खेती के लिए बैंक ऋण प्राप्त करने और सरकारी खरीद केंद्रों पर अपनी उपज बेचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (द्वितीय संशोधन) अध्यादेश, 2026 के माध्यम से राजस्व संहिता-2006 में संशोधन करते हुए धारा-76(1) के अंतर्गत (घघघ) और (घघघघ) जोड़कर इन परिवारों को असंक्रमणीय अधिकार संहिता के लागू होने की तिथि से दिया जा रहा है। इस फैसले से न सिर्फ इन परिवारों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी, बल्कि उनका आर्थिक सशक्तीकरण भी होगा।

इन जिलों में रह रहे ये परिवार

सुरेश खन्ना ने बताया कि लखीमपुर में शरणार्थी परिवारों की संख्या 2350, पीलीभीत में 4000, बिजनौर के 18 ग्रामों में 3856 और रामपुर के 16 ग्रामों में 2174 है।

 

पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित परिवारों को एक रुपये की लीज पर मिलेगी जमीन

पूर्वी पाकिस्तान से 63 विस्थापित हिंदू बंगाली परिवारों को कानपुर देहात की तहसील रसूलाबाद में पुनर्वासित किए जाने के लिए निर्धारित लीज रेंट एक रुपये और पट्टे के लिए निर्धारित प्रारूप को मंत्रिपरिषद ने मंजूरी दे दी है। इस संबंध में कानपुर देहात के डीएम ने 27 मार्च 2026 को आदेश जारी किया था। इस आदेश पर कैबिनेट ने भी कार्योत्तर मुहर लगा दी है।

यहां बता दें कि मेरठ की तहसील मवाना के ग्राम नंगला गोसाई में पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) से विस्थापित 99 परिवारों को कानपुर देहात की तहसील रसूलाबाद के ग्राम भैंसाया और ताजपुर तरसौली में पुनर्वासित किए जाने का आदेश फरवरी में जारी किया गया था। उक्त आदेश में लीज रेंट और पट्टे के प्रारूप का उल्लेख नहीं किया गया था।

 

UP Cabinet: Shikshamitras’ Honorarium Nearly Doubled; Government to Conserve Monuments—Read 22 Major Decisions

यूपी कैबिनेट बैठक। – फोटो : amar ujala

कुशीनगर में नारायणी नदी पर पुल निर्माण को मंजूरी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में कुशीनगर के खड्डा विधानसभा क्षेत्र के निवासियों के लिए एक बड़ा निर्णय लिया गया है। सरकार ने नारायणी नदी के भैंसहा घाट पर एक नए बड़े पुल के निर्माण के प्रस्ताव को प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति दे दी है। इसका निर्माण ईपीसी मोड में होगा, जिसकी कुल प्रस्तावित लागत 705 करोड़ रुपये है।

वर्तमान में इस घाट पर नदी पार करने का एकमात्र साधन पीपे का पुल (पॉन्टून पुल) है, जिसे मानसून के दौरान हटा दिया जाता है। नए पक्के पुल के बनने से बिहार और महराजगंज की यात्रा बारहमासी और सुगम हो जाएगी। इस पुल के निर्माण से बिहार और महराजगंज जाने के लिए यात्रियों को लगभग 40-50 किलोमीटर की कम दूरी तय करनी होगी। परियोजना से कुशीनगर और महराजगंज जिले के दर्जनों गांवों को सीधा लाभ मिलेगा।

 

छिबरामऊ में गंगा पुल को मंजूरी, 289 करोड़ होंगे खर्च

कन्नौज के विधानसभा क्षेत्र छिबरामऊ के विकास खंड गुरसहायगंज में ग्राम चियांसार व च्यवन ऋषि आश्रम के पास गंगा नदी पर पुल के निर्माण को मंजूरी दे दी गई है। इस पुल के निर्माण से कन्नौज और हरदोई के करीब 4 लाख नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा। परियोजना के पूरे होने पर कन्नौज साइड से रतनगंगा नदी सेतु, पतिया बैरियर और रामगंगा नदी सेतु के माध्यम से हरदोई, बरेली एवं शाहजहांपुर जिलों से संपर्क सुगम होगा।

वहीं, हरदोई साइड के निवासी छिबरामऊ, गुरसहायगंज, कन्नौज, कानपुर और फर्रुखाबाद से राष्ट्रीय राजमार्ग-34 व आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के माध्यम से जुड़ सकेंगे। इससे समय एवं ईंधन की बचत होगी। यह परियोजना इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एवं कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) मोड पर लागू की जाएगी। परियोजना की अनुमानित लागत 289 करोड़ रुपये है, जिसे वित्त समिति द्वारा अनुमोदित किया जा चुका है।

49 स्टेशनों के आधुनिकीकरण को मंजूरी

प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के तीन महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई। परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने बताया कि पीपीपी मॉडल पर निगम के 49 बस स्टेशनों को द्वितीय चरण में विकसित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि इन बस स्टेशनों का विकास डीबीएफओटी मॉडल के तहत किया जाएगा, जिससे यात्रियों को अत्याधुनिक सुविधाएं मिल सकेंगी। प्रस्तावित बस स्टेशनों पर शॉपिंग मॉल, फूड कोर्ट, सिनेमाघर सहित अन्य व्यावसायिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। सरकार का मानना है कि इससे बस अड्डे केवल परिवहन केंद्र न रहकर आर्थिक गतिविधियों के हब बनेंगे। 

कैबिनेट ने बुलंदशहर के नरौरा, बलरामपुर की तहसील तुलसीपुर और हाथरस की तहसील सिकंदराराऊ में नए बस स्टेशन निर्माण के लिए निःशुल्क भूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी है। बुलंदशहर में पूर्व में एनपीसीआईएल की लीज भूमि पर संचालित डिपो की अवधि समाप्त होने के बाद अब सिंचाई विभाग की 1.12 हेक्टेयर भूमि दी जाएगी। वहीं तुलसीपुर में लोक निर्माण विभाग की 2 हेक्टेयर और सिकंदराराऊ में 10.012 हेक्टेयर भूमि परिवहन विभाग को हस्तांतरित होगी।

निवेशकों के लिए शर्तों में ढील

निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार ने शर्तों में भी ढील दी है। तकनीकी पात्रता को 150 प्रतिशत से घटाकर 100 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि अनुभव की समय सीमा 5 वर्ष से बढ़ाकर 8 वर्ष कर दी गई है। इसके अलावा सभी प्रस्तावित स्थलों पर 2.5 का फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) और ग्राउंड कवरेज की निःशुल्क अनुमति भी दी जाएगी।

परिवहन मंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से यात्रियों को सस्ती, सुरक्षित और सुविधाजनक परिवहन सेवाएं मिलेंगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और व्यावसायिक गतिविधियों से निगम के राजस्व में भी इजाफा होगा।

 

योगी सरकार ने ग्रेटर नोएडा में ‘मेट्रो विश्वविद्यालय’ की स्थापना को दी मंजूरी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में उच्च शिक्षा विभाग से संबंधित महत्वपूर्ण प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई। इस क्रम में ग्रेटर नोएडा में निजी क्षेत्र के अंतर्गत ‘मेट्रो विश्वविद्यालय’ की स्थापना को मंजूरी दी गई है, जो प्रदेश में उच्च शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 के प्रावधानों के अंतर्गत यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि उक्त अधिनियम के तहत निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना, उनके विनियमन एवं संचालन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

संचालन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित 

उन्होंने बताया कि प्रायोजक संस्था सनहिल हेल्थकेयर प्रा. लि., नोएडा द्वारा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से आवंटित 26.1 एकड़ भूमि पर ‘मेट्रो विश्वविद्यालय’ स्थापित करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था, जिसे विधिक प्रावधानों के अनुरूप परीक्षण के उपरांत स्वीकृति दी गई है।

इसके लिए उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 की अनुसूची में संशोधन करते हुए ‘उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) अध्यादेश, 2026’  प्रख्यापित किए जाने तथा प्रायोजक संस्था को संचालन प्राधिकार-पत्र निर्गत करने का निर्णय लिया गया है।

उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना से प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के नए अवसर सृजित होंगे तथा युवाओं को आधुनिक एवं रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध कराई जा सकेगी। यह पहल राज्य को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उन्होंने कहा कि योगी सरकार उच्च शिक्षा के विस्तार, गुणवत्ता संवर्धन और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। नए विश्वविद्यालयों की स्थापना से प्रदेश में शिक्षा के साथ-साथ रोजगार और कौशल विकास के अवसर भी बढ़ेंगे।

22 बलिया में खुलेगा मेडिकल कॉलेज, निशुल्क मिलेगी कारागार विभाग की जमीन

बलिया में स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय खुलेगा। इसके लिए जिला कारागार विभाग की 14.05 एकड़ जमीन चिकित्सा शिक्षा विभाग को दी जाएगी। महाविद्यालय निर्माण में 437.0021करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है।

प्रदेश सरकार की ओर से हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज खोला जा रहा है। इसी के तहत बलिया में भी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय खोलने की योजना तैयार की गई। सभी विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने के बाद तय किया गया है कि जिला कारागार की 14.05 एकड़ जमीन चिकित्सा शिक्षा विभाग को निशुल्क उपलब्ध क राई जाएगी।

कारागार के भवन का ध्वस्तीकरण और मलबा हटाने का कार्य चिकित्सा शिक्षा विभाग करेगा। भवन के निर्माण कर 437.0021 करोड़ रुपया खर्च किया जाएगा। प्रदेश सरकार ने बजट वर्ष 2026-27 में 25 करोड़ का प्रावधान किया है।

मेडिकल कॉलेज बनने से इलाके के लोगों को विशिष्ट चिकित्सा सुविधा मिल सकेगा। भवन निर्माण कार्य पूरा होने और अन्य संसाधन का इंतजाम होने के बाद यहां एमबीबीएस की 100 सीटों से पढ़ाई शुरू करने की तैयारी है।

 

मंत्रीपरिषद ने प्रदेश में 24 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव को दी मंजूरी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में 24,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। शाहजहांपुर, गोरखपुर, ग्रेटर नोएडा, प्रयागराज, हाथरस, यमुना, मुरादाबाद में औद्योगिक इकाईयां स्थापित होंगी। जल्द ही सभी कम्पनियों को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी किया जाएगा।

बैठक में ओएफबी टैंक प्राइवेट लिमिटेड को शाहजहांपुर में 589.98 करोड़ की लागत से एग्रो केमिकल्स प्लांट स्थापित करने, इंडिया ग्लाइकौल्स लिमिटेड को गोरखपुर में 669.93 करोड़ से एथेनॉल संयंत्र स्थापित करने, सीईएसी ग्रीन पॉवर लिमिटेड को यमुना औद्योगिक विकास प्राधिकरण और बुन्देलखण्ड में 3805 करोड़ की लागत से सोलर सेल प्लांट स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

इसी तरह बिसलेरी इंटरनेशनल को सरस्वती हाइटेक सिटी प्रयागराज में 269.31 करोड़ की लागत से कार्बनेटेड सॉफ्टड्रिंक, सोडा आदि प्लांट स्थापित करने, एजीआई ग्रीन पैक की हाथरस में 1128.72 करोड़ से एल्युमिनियम कैन विनिर्माण इकाई स्थापित करने, इंटीग्रेटेड बैटरीज इंडिया को यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में 1146 करोड़ से सोलर सेल निर्माण संयंत्र स्थापित करने, त्रिवेणी इंजीनियरिंग एण्ड इंडस्ट्रीज को 237 करोड़ से मुरादाबाद में एथेनाल इकाई स्थापित करने के लिए स्वीकृति प्रदान की गई। अवाडा इलेक्ट्रो लिमिटेड को दो सितम्बर 2025 को मंत्रिपरिषद द्वारा परियोजना लागत 11,399 करोड़ के प्रस्ताव की स्वीकृति को संशोधित कर 13,640.79 करोड़ के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई।

औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नन्दी ने कहा कि उत्तर प्रदेश निवेश का प्रमुख गंतव्य बन कर उभरा है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में निवेशक प्रदेश में निवेश के लिए स्वयं आगे आ रहे हैं। अब प्रत्येक निवेश प्रस्ताव को धरातल पर साकार करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। एक-एक एमओयू का फॉलोअप किया जा रहा है।

 

तदर्थ कर्मचारी को विनियमित किए जाने के प्रस्ताव को हरी झंडी

कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम, 1961 की धारा-47(1) के अंतर्गत कर अधिकारी के पद पर की गई तदर्थ नियुक्ति को विनियमित किए जाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। इसी के मद्देनजर संबंधित प्रस्ताव लाया गया था।

अध्यादेश के जरिये आसान की जाएगी भू-उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया

कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को जारी करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। इस अध्यादेश के जारी होने पर विकास प्राधिकरणों, औद्योगिक विकास प्राधिकरणों, विनियमित क्षेत्रों और उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के अधीन क्षेत्रों में गैर-कृषि उपयोग (लैंड यूज) परिवर्तन की प्रक्रिया बेहद सरल हो जाएगी। अब इन क्षेत्रों में अलग से लैंड यूज बदलवाने की आवश्यकता नहीं होगी।

23 मार्च 2026 को हुई कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा-80 में संशोधन की मंजूरी दे दी गई थी। इसके तहत अगर किसी भूखंड का नक्शा प्राधिकरण द्वारा पास हो जाता है, तो संबंधित भूमि का भू-उपयोग वही हो जाएगा, जिस उपयोग के लिए नक्शा पास किया गया है। 

इससे पहले लोगों को दोहरी प्रक्रिया यानी पहले लैंड यूज परिवर्तन और फिर नक्शा पास कराने से गुजरना पड़ता था, जिससे समय और संसाधनों की अधिक खपत होती थी। राज्य सरकार ने यह कदम उद्योग लगाने या फिर कारोबार करने वालों को राहत देने के लिए उठाया है।

विधानसभा सत्र हाल-फिलहाल में आहूत होने वाला नहीं है, इसलिए अध्यादेश के माध्यम से इन बदलावों को लागू करने के लिए प्रस्ताव लाया गया था, जिसे मंजूरी दे दी गई है।

 

UP Cabinet: Shikshamitras’ Honorarium Nearly Doubled; Government to Conserve Monuments—Read 22 Major Decisions

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना – फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

यातायात नियमों का उल्लंघन करने समेत छोटे अपराधों में बचना होगा नामुमकिन

यातायात नियमों का उल्लंघन करने समेत कई तरह के गैर शमनीय अपराध करने के बाद अब बचना नामुमकिन होगा। कैबिनेट ने इस बाबत सुप्रीम कोर्ट में लंबित रिट याचिका पर दिए गए आदेश का पालन करने के लिए उप्र आपराधिक विधि (अपराधों का शमन और विचारणों का उपशमन) (संशोधन) अध्यादेश लाने के गृह विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

कैबिनेट की मंजूरी के बाद अध्यादेश में संशोधन किया जाएगा। इसके तहत गैर शमनीय अपराध पूर्व की तरह उपशमित (समाप्त) नहीं होंगे। अध्यादेश में संशोधन के बाद जिन अपराधों में अनिवार्य कारावास का दंड है, वे अपराध जो प्रथम अपराध नहीं हैं, अर्थात वे बाद के अपराध है, वे पूर्व की भांति स्वत: समाप्त नहीं होंगे। उदाहरण के लिए यदि वर्तमान में किसी व्यक्ति के द्वारा मोटर वाहन अधिनियम के तहत अपराध किया गया है और वह जुर्माना नहीं देता है तो एक समय बीतने के बाद कार्यवाही स्वत: समाप्त हो जाती है। 

अब उसे भी दंड का सामना करना होगा। बता दें कि उप्र आपराधिक विधि (अपराधों का शमन और विचारणों का उपशमन) (संशोधन) अध्यादेश, 2023 मजिस्ट्रेट के सामने लंबित छोटे आपराधिक मामलों को समाप्त करने का प्रावधान करता है। यह अदालती बोझ कम करने के लिए समझौता या शमन (कंपाउंडिंग) की अनुमति देता है। 

यह विभिन्न कानूनों जैसे मोटर वाहन एक्ट 1939, न्यूनतम वेतन एक्ट 1948, पुलिस एक्ट 1861, और दंड प्रक्रिया संहिता 1973 के तहत किए गए अपराधों पर लागू होता है। अध्यादेश में संशोधन के बाद अपराध करने वाला अब बच नहीं सकेगा और साक्ष्यों के आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। इससे नियमों का उल्लंघन करने वालों के भीतर कानून का भय उत्पन्न होगा, जिससे अपराधों में कमी आएगी।

 

11 विवादित उप्र मदरसा विधेयक, 2016 वापस लेने की प्रक्रिया जल्द होगी पूरी

योगी सरकार मदरसों के शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन भुगतान में देरी को लेकर अखिलेश सरकार के समय के विवादित विधेयक को वापस लेगी। उत्तर प्रदेश मदरसा (अध्यापकों एवं अन्य कर्मचारियों के वेतन का भुगतान) विधेयक, 2016 को वापस लेने के लिए अब इसे विधानमंडल के दोनों सदनों में विचार होगा। इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। इस विधेयक में मदरसा शिक्षकों को वेतन देने में देरी होने पर संबंधित अधिकारियों को आपराधिक दंड देने के प्रावधान थे।

सपा सरकार ने मदरसा शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए ऐसा विधेयक बनाया था जो बेसिक व माध्यमिक शिक्षकों की तर्ज पर था। इस विधेयक में कुछ ऐसे प्रावधान थे, जिसके तहत मदरसा शिक्षकों व कर्मचारियों का वेतन समय पर न मिलने पर संबंधित अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमा तक दर्ज कराया जा सकता था। इसके कुछ और बिंदुओं से तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने इस पर आपत्ति जताते हुए यह विधेयक राष्ट्रपति के पास भेज दिया था।

केंद्र के न्याय विभाग और गृह मंत्रालय ने इस विधेयक की कुछ धाराओं पर गंभीर आपत्तियां जताई थीं। यह भी कहा कि इसके कई प्रावधान पहले से मौजूद कानून की धाराओं की विरोधाभासी हैं। इन आपत्तियों के आधार पर केंद्र सरकार ने प्रदेश सरकार को सलाह दी कि वह इस विधेयक को वापस लेकर आवश्यक संशोधनों के साथ नया विधेयक लाने पर विचार करे।

इसी को देखते हुए बीते वर्ष 22 दिसंबर को कैबिनेट ने इस विधेयक को केंद्र से वापस लेने के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी थी। अब अगला कदम राज्यपाल के संदेश के जरिये इस मुद्दे को विधानमंडल के दोनों सदनों के समक्ष पुनर्विचार के लिए प्रस्तुत करना है।

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