हमारे समय में आपको 40000 मिलता था और 9 साल की प्रताड़ना के बाद, शिक्षामित्रों की एकता, एकजुटता और रोष से डरकर भाजपा सरकार ने एहसान दिखाते हुए पैसे बढ़ाए भी तो केवल 18000, वो भी हार के डर से। अगर भाजपा सच में हितैषी है तो पिछले सालों का बकाया भी दे।
भाजपा सरकार की उपेक्षा के कारण शिक्षामित्रों को 22000 हर महीने का जो घाटा, सालों साल हुआ है, उसको सांकेतिक संख्या मानकर हर विधानसभा के सारे पीड़ित शिक्षामित्र मिलकर अपने परिवार, रिश्ते-नातेदारों, शुभचिंतकों और आसपास के लोगों के 22000 वोट भाजपा के ख़िलाफ़ डलवाकर भाजपा को हराने का संकल्प लेकर ‘पीडीए सरकार’ बनवाएंगे क्योंकि सबसे ज़्यादा ज्यादती शिक्षामित्रों और उनके परिवारवालों के ही साथ हुई है। जिन शिक्षामित्रों को इस भाजपाई प्रताड़ना के कारण अपनी जान गंवानी पड़ी, हम भविष्य में उनके परिजनों के सहयोग-समर्थन के लिए वचनबद्ध हैं।
हर विधानसभा में भाजपा के 22000 वोट काटकर शिक्षामित्र भाजपा का SIR कर देंगे। इस SIR में ‘S’ को ‘शिक्षामित्र’ पढ़ा-समझा जाए! जब हर विधानसभा में भाजपा के 22000 वोट घट जाएंगे तो भाजपा हारकर कहाँ मुँह छिपाएगी?
पीडीए सरकार आने पर शिक्षामित्रों के मान-सम्मान-मानदेय सबमें वृद्धि होगी। शिक्षा की दुश्मन भाजपा से शिक्षामित्र कोई उम्मीद न करें।
शिक्षामित्र कहे आजका, नहीं चाहिए भाजपा!
छोटी चिट्ठी, बड़ा संदेश!
आपका
अखिलेश
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