पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को पुनः मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से भारत सरकार के कराए गए सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं।
इसमें 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग के ऐसे बच्चों की पहचान की गई है,
जिन्होंने प्रारंभिक कक्षाओं में पढ़ाई तो की, लेकिन 10वीं या 12वीं तक पहुंचने से पहले ही विद्यालय जाना बंद कर दिया।
देश भर में यह संख्या 2 करोड़ 72 लाख है, जिनमें से उत्तर प्रदेश के 47.69 लाख बच्चे शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश के ‘आउट ऑफ स्कूल’ बच्चों को इंटरमीडिएट तक शिक्षा देने के लिए योजना तैयार की गई है। इसके लिए प्रदेश सरकार और राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संस्थान (एनआईओएस) के बीच समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
यह सर्वे करीब तीन वर्ष की अवधि में किया गया है। इन बच्चों की पहचान उन्हें विद्यालय से मिलने वाले यूनिक नंबर (अपार आईडी) के आधार पर की गई है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने इन बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने के लिए ठोस योजना तैयार की है। एनआईओएस की मदद से इन बच्चों को दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से पढ़ाई का अवसर दिया जाएगा।
इसके लिए जिला या ब्लॉक स्तर पर पीएमश्री विद्यालय में इनका नामांकन प्रदेश सरकार कराएगी। इसके बाद एनआईओएस के माध्यम से पाठ्य सामग्री संबंधित विद्यार्थियों के घर भेजी जाएगी।
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