डीएम के “रेड” में शिक्षा व्यवस्था “बेनकाब”: बच्चों का भविष्य दांव पर, प्रधानाध्यापिका पर गिरी गाज।
विनोद मिश्रा
बांदा। सरकारी स्कूलों की “हकीकत” एक बार फिर “बेनकाब” हो गई, जब जिलाधिकारी जे. रीभा ने तिंदवारी ब्लॉक के स्कूलों पर अचानक छापा मार दिया। इस औचक निरीक्षण में जो तस्वीर सामने आई, उसने “शिक्षा व्यवस्था की नींव” तक “हिला” दी कहीं “पढ़ाई ठप” मिली, तो कहीं “गंदगी का अंबार” और “जिम्मेदार बेखबर” नजर आए।
पूर्व माध्यमिक विद्यालय जसईपुर में हालात इतने खराब मिले कि “डीएम तक हैरान” रह गईं। स्कूल में न तो पढ़ाई का कोई माहौल था और न ही अनुशासन का कोई नामोनिशान। कक्षाओं में “सन्नाटा” और व्यवस्थाओं में “ढिलाई” साफ दिख रही थी। डीएम ने जब बच्चों की “पढ़ाई जांचने” के लिए उन्हें “ब्लैकबोर्ड” पर बुलाया, तो उनकी “शैक्षणिक स्थिति बेहद कमजोर” पाई गई। इससे साफ हो गया कि “स्कूल में शिक्षा केवल कागजों” तक सीमित है।
स्कूल परिसर में गंदगी का आलम देखकर डीएम ने कड़ी नाराजगी जताई। साफ-सफाई के नाम पर लापरवाही और अव्यवस्था साफ नजर आई। यही नहीं, रिकॉर्ड में भी खामियां मिलीं उपस्थिति रजिस्टर, कंपोजिट ग्रांट और अन्य अभिलेखों का रख-रखाव भी संतोषजनक नहीं था। इस गंभीर लापरवाही पर डीएम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए प्रधानाध्यापिका के खिलाफ कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए।
प्राथमिक विद्यालय छापर का निरीक्षण भी किया। यहां भी व्यवस्थाएं अधूरी और सुधार की जरूरत में नजर आईं। डीएम ने शिक्षकों को फटकार लगाते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि शिक्षा की गुणवत्ता में तत्काल सुधार किया जाए। डीएम ने विद्यार्थियों से सीधे सवाल-जवाब कर उनकी पढ़ाई का स्तर परखा। बच्चों के जवाबों ने सिस्टम की हकीकत खोलकर रख दी। साफ दिखा कि निगरानी के अभाव में शिक्षा व्यवस्था पटरी से उतर चुकी है।
डीएम जे. रीभा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अब शिक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्कूलों की नियमित निगरानी की जाए और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
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