राहत: एनपीएस में अब सीधे बैंक खाते में आएगा चिकित्सा भत्ता
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के तहत आने वाले पेंशनरों के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब उन्हें निश्चित चिकित्सा भत्ता पाने के लिए कोई बिल या दावा जमा नहीं करना पड़ेगा। यह राशि सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाएगी।
वित्त मंत्रालय ने हाल ही में इस संबंध में आदेश जारी किया है। इसके मुताबिक, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के पात्र पेंशनर और पारिवारिक पेंशनर को यह भत्ता स्वचालित तरीके से मिलेगा यानी अब पहले की तरह कागजी प्रक्रिया या आवेदन की जरूरत नहीं होगी।
नई व्यवस्था में पेंशन देने वाले बैंक अपनी सेंट्रल पेंशन प्रोसेसिंग इकाइयों के जरिए यह भुगतान करेंगे। इसके लिए पहले केंद्रीय पेंशन लेखा कार्यालय (सीपीएओ) पात्रता की जांच करेगा और बैंक को अनुमति देगा, जिसके बाद पैसा सीधे खाते में जमा कर दिया जाएगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस फैसले से बुजुर्ग पेंशनरों को बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि अब उन्हें मेडिकल बिल जमा करने या दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। साथ ही, भुगतान तेज और पारदर्शी होगा।
सरकार ने यह भी तय किया है कि यह राशि हर तीन महीने (तिमाही) में खाते में जमा की जाएगी, ताकि पेंशनरों को नियमित रूप से लाभ मिलता रहे। अगर कोई पेंशनभोगी अपना बैंक या ब्रांच बदलता है, तो ट्रांसफर की प्रक्रिया मौजूदा सीपीएओ दिशा- निर्देशों के अनुसार होगी।
मृत्यु के बाद पात्र परिवार के लिए क्या है नियम
सरकार ने परिवारों के लिए प्रक्रिया भी आसान रखी है। अगर किसी पेंशनभोगी की मृत्यु हो जाती है और पात्र परिवार के सदस्य का नाम पहले से दर्ज है, तो वे मृत्यु प्रमाणपत्र के साथ सीधे बैंक में आवेदन कर सकते हैं और उन्हें चिकित्सा भत्ता मिलना शुरू हो जाएगा। वहीं, अगर नाम रिकॉर्ड में नहीं है, तो संबंधित विभाग के जरिए नई मंजूरी लेनी होगी।
केंद्रीय कर्मचारी को ओपीडी सेवा चुनने का विकल्प उपलब्ध होगा
इसके अलावा, पेंशनभोगियों के पास यह विकल्प भी है कि वे तय चिकित्सा भत्ते की जगह केंद्रीय कर्मचारी स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) की ओपीडी सुविधा चुन सकते हैं।
इस व्यवस्था में बैंक पहले भत्ते का भुगतान करेंगे और बाद में सरकार उन्हें इसकी प्रतिपूर्ति करेगी। इसका मकसद प्रक्रिया को आसान बनाना और पेंशनभोगियों को कागजी झंझट से राहत देना है।
पेंशनभोगियों को जीवन प्रमाणपत्र देना अनिवार्य रहेगा
सरकार ने साफ किया है कि पेंशनभोगियों को हर साल नवंबर में अपना ‘जीवन प्रमाणपत्र’ जमा करना होगा, जिसे वे डिजिटल तरीके से या बैंक जाकर दे सकते हैं। अगर यह प्रमाणपत्र नवंबर में जमा नहीं किया गया, तो दिसंबर से पेंशन और चिकित्सा भत्ते के भुगतान पर असर पड़ सकता है।
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