चेन्नई, एजेंसी। मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को इस बात को स्वीकार किया कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार मौजूद है और न्यायाधीशों को पवित्र गायों की तरह नहीं माना जाना चाहिए।
अदालत को यह टिप्पणी तमिल फिल्म ‘करुप्पू’ पर प्रतिबंध लगाने की याचिका को खारिज करते हुए आई, जिसमें न्यायपालिका को कथित तौर पर गलत तरीके से चित्रित किया गया है। न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथन और न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन की पीठ ने कहा कि ‘कोई भी इस बात से इनकार नहीं कर सकता कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है। पहले भी भ्रष्ट जज थे और आज भी हैं… हम जानते हैं और हमें न्यायिक भ्रष्टाचार के मामले देखने को मिले हैं। मद्रास हाईकोर्ट की फुल कोर्ट नियमित रूप से ऐसी काली भेड़ों ((भ्रष्ट लोग) को बाहर का रास्ता दिखा देती है।’ हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार को अक्सर बार (वकीलों के समूह) के सदस्य बढ़ावा देते हैं और हाईकोर्ट हमेशा भ्रष्ट लोगों को पकड़ने और स्थिति से उचित तरीके से निपटने के लिए कड़ी नजर रखता है। पीठ ने कहा ‘जजों को पवित्र गाय की तरह नहीं माना जाना चाहिए।
न्याय कोई छिपी हुई चीज नहीं है, उसे आम लोगों की जांच-परख और सम्मानजनक, भले ही बेबाक टिप्पणियों का सामना करने की अनुमति दी जानी चाहिए।’ याचिकाकर्ता ने फिल्म पर प्रतिबंध लगाने या उसे नियंत्रित करने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उसने दलील दी थी कि फिल्म के एक सीन में एक जज को रिश्वत लेते और नशीले पदार्थों का सेवन करते हुए दिखाया गया है। उसने तर्क दिया कि ऐसे सीन संविधान के खिलाफ हैं और जजों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाते हैं।
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