एक तरफ जनगणना, दूसरी तरफ TET: दोहरी चुनौती से जूझ रहे यूपी के 1.86 लाख शिक्षक – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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सुप्रीम कोर्ट से समय मिला, लेकिन बढ़ीं मुश्किलें; सरकारी जिम्मेदारियों और TET तैयारी के बीच फंसे शिक्षक

उत्तर प्रदेश के लाखों शिक्षक इन दिनों एक अनोखी चुनौती का सामना कर रहे हैं। एक ओर उन्हें देश की सबसे बड़ी प्रशासनिक कवायदों में शामिल जनगणना कार्य की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है, तो दूसरी ओर शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की तैयारी का दबाव भी बना हुआ है।

हरदोई के एक प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत एक शिक्षक बताते हैं कि दिनभर जनगणना संबंधी कार्यों में व्यस्त रहने के बाद रात में TET की तैयारी करना बेहद कठिन हो जाता है। उनका कहना है कि शारीरिक और मानसिक थकान के बावजूद परीक्षा पास करना उनके भविष्य के लिए अनिवार्य है।

यह स्थिति केवल एक शिक्षक की नहीं है। प्रदेश के लगभग 1.86 लाख शिक्षक इसी दुविधा से गुजर रहे हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने TET पास करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी है, जिससे शिक्षकों को कुछ राहत जरूर मिली है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में समयसीमा बढ़ाने की मांग स्वीकार नहीं की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने अनिवार्यता बरकरार रखी

29 मई को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने समीक्षा याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए TET की अनिवार्यता में किसी प्रकार की छूट देने से इनकार कर दिया। अदालत ने माना कि प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए TET आवश्यक है। हालांकि व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए संविधान के अनुच्छेद-142 के तहत शिक्षकों को एक वर्ष का अतिरिक्त समय प्रदान किया गया।

यह फैसला सितंबर 2025 में दिए गए उस महत्वपूर्ण निर्णय का विस्तार है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले ऐसे सभी शिक्षक, जिनकी सेवा में पांच वर्ष से अधिक समय शेष है, उन्हें निर्धारित अवधि के भीतर TET उत्तीर्ण करना होगा।

बढ़ती जिम्मेदारियों के बीच तैयारी की चुनौती

शिक्षकों की सबसे बड़ी चिंता समय को लेकर है। जुलाई में TET परीक्षा प्रस्तावित है, जबकि सितंबर में CTET आयोजित होने की संभावना है। इसी दौरान जनगणना, विभिन्न सर्वेक्षण, नामांकन अभियान, निर्वाचन संबंधी कार्य तथा अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी शिक्षकों के हिस्से में हैं।

शिक्षकों का कहना है कि परीक्षा की तैयारी के लिए नियमित अध्ययन आवश्यक है, लेकिन लगातार गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने के कारण पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है।

शिक्षक संगठनों ने उठाए सवाल

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के नेता निर्भय सिंह का कहना है कि शिक्षक पहले से ही बीएलओ ड्यूटी, सर्वेक्षण, जनगणना और अन्य सरकारी कार्यों में व्यस्त हैं। ऐसे में TET की तैयारी के लिए पर्याप्त समय निकालना मुश्किल हो गया है। उनका सुझाव है कि परीक्षा से पूर्व शिक्षकों को अतिरिक्त प्रशासनिक कार्यों से अस्थायी राहत दी जानी चाहिए।

वहीं, टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा का कहना है कि संगठन अब क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल करने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है। साथ ही शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए आंदोलन की रणनीति भी तैयार की जा रही है।

विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी और महासचिव दिलीप चौहान ने भी फैसले पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को राहत मिलनी चाहिए।

गुणवत्ता बनाम अनुभव की बहस

यह विवाद केवल नौकरी या पदोन्नति तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षक प्रशिक्षण से भी जुड़ा हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि TET प्राथमिक स्तर पर शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। वहीं शिक्षक संगठनों का तर्क है कि 15-20 वर्षों से सफलतापूर्वक अध्यापन कर रहे शिक्षकों की क्षमता को केवल एक परीक्षा के आधार पर नहीं परखा जाना चाहिए।

विशेष रूप से 40 से 50 वर्ष आयु वर्ग के शिक्षकों के लिए वर्षों बाद प्रतिस्पर्धी परीक्षा की तैयारी करना आसान नहीं है। बदलते पाठ्यक्रम, नए परीक्षा पैटर्न और डिजिटल अध्ययन संसाधनों के बीच उन्हें स्वयं को फिर से विद्यार्थी की भूमिका में ढालना पड़ रहा है।

समाधान क्या हो सकता है?

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाए तो इस चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है। शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम, ऑनलाइन अध्ययन सामग्री, अध्ययन अवकाश, जिला स्तरीय कोचिंग सहायता और गैर-शैक्षणिक कार्यों में अस्थायी राहत जैसे कदम काफी मददगार साबित हो सकते हैं।

फिलहाल दबाव में शिक्षक समुदाय

वर्तमान स्थिति में उत्तर प्रदेश के लाखों शिक्षक दोहरी जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। एक हाथ में जनगणना के प्रपत्र हैं तो दूसरे हाथ में TET की किताबें। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें एक अतिरिक्त अवसर जरूर दिया है, लेकिन इस अवसर का पूरा लाभ तभी मिल सकेगा जब उन्हें तैयारी के लिए पर्याप्त समय और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाए।

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