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बेसिक शिक्षा विभाग की नई पहल, आनंद मॉड्यूल और खेल गतिविधियों पर भी विशेष जोर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और बच्चों को व्यावहारिक ज्ञान से जोड़ने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। विभाग द्वारा प्रदेश के 45,628 प्राथमिक विद्यालयों में विज्ञान-गणित किट उपलब्ध कराई गई हैं, जिनके माध्यम से विद्यार्थियों को वैज्ञानिक और गणितीय अवधारणाओं को प्रयोग करके समझने का अवसर मिलेगा।

शिक्षा विभाग का मानना है कि केवल पुस्तकीय ज्ञान के बजाय प्रयोग आधारित शिक्षा बच्चों की समझ, जिज्ञासा और रचनात्मकता को अधिक प्रभावी ढंग से विकसित करती है। इसी उद्देश्य से विद्यालयों में विज्ञान और गणित को रोचक तथा व्यवहारिक बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रयोगों के माध्यम से सीखेंगे बच्चे

विज्ञान-गणित किट के जरिए छात्र विभिन्न वैज्ञानिक सिद्धांतों और गणितीय अवधारणाओं को स्वयं प्रयोग करके समझ सकेंगे। इससे बच्चों में तार्किक सोच, समस्या समाधान क्षमता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब बच्चे किसी विषय को केवल पढ़ने के बजाय उसे प्रयोग करके समझते हैं तो उनकी सीखने की क्षमता और विषय के प्रति रुचि दोनों बढ़ती हैं। यही कारण है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी अनुभवात्मक और गतिविधि आधारित शिक्षा पर विशेष बल दिया गया है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ बढ़ेगी रचनात्मकता

विभाग के अनुसार इस पहल से बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ-साथ नवाचार और खोज की भावना को भी प्रोत्साहन मिलेगा। विद्यालयों में अब कक्षा शिक्षण के साथ प्रयोग आधारित गतिविधियों को नियमित रूप से शामिल किया जाएगा।

इस व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों को केवल परीक्षा तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें वास्तविक जीवन की समस्याओं को समझने और उनका समाधान खोजने के लिए तैयार करना भी है।

आनंद मॉड्यूल से होगा सर्वांगीण विकास

बेसिक शिक्षा विभाग ने बच्चों के भावनात्मक, सामाजिक और रचनात्मक विकास के लिए “आनंद मॉड्यूल” भी तैयार किया है। इसके अंतर्गत प्रत्येक शनिवार को विद्यालयों में खेल, कला, संगीत, कहानी, समूह गतिविधियां और अन्य रचनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

इन गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों को आनंदपूर्ण वातावरण में सीखने का अवसर प्रदान करना है। विभाग का मानना है कि इससे विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, सहयोग की भावना, अभिव्यक्ति क्षमता और सामाजिक कौशल का विकास होगा।

नैतिक मूल्यों पर भी रहेगा फोकस

स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका एस. गर्ग के अनुसार बच्चों में नैतिक मूल्यों का विकास भी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए विद्यालयों में प्रार्थना सभाओं और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को अनुशासन, सम्मान, सदाचार, सहयोग और मानवीय मूल्यों की शिक्षा दी जा रही है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक तैयार करना भी है।

खेल संस्कृति को बढ़ावा देने की तैयारी

विद्यालयों में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए विभाग ने प्राथमिक विद्यालयों को 5,000 रुपये तथा उच्च प्राथमिक विद्यालयों को 10,000 रुपये की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई है। इस धनराशि का उपयोग खेल सामग्री खरीदने और खेलकूद गतिविधियों को प्रोत्साहित करने में किया जाएगा।

शिक्षा विभाग का मानना है कि खेल बच्चों के शारीरिक विकास के साथ-साथ टीमवर्क, नेतृत्व क्षमता और मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाते हैं।

नई शिक्षा व्यवस्था की ओर बढ़ता कदम

विज्ञान-गणित किट, आनंद मॉड्यूल और खेल आधारित गतिविधियों जैसी पहलें यह संकेत देती हैं कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था अब रटंत प्रणाली से आगे बढ़कर अनुभवात्मक और कौशल आधारित शिक्षा की ओर कदम बढ़ा रही है।

यदि इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाता है तो लाखों बच्चों को गुणवत्तापूर्ण, रोचक और व्यवहारिक शिक्षा प्राप्त होगी, जिससे उनका सर्वांगीण विकास संभव हो सकेगा।

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