भर्ती परीक्षाओं की गोपनीय सामग्री सात दिन में निस्तारित करने के निर्देश – UpdateMarts| PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी गोपनीय सामग्री के सुरक्षित और समयबद्ध निस्तारण को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह (एस.पी. गोयल) ने सभी भर्ती आयोगों, चयन बोर्डों और संबंधित विभागों को आदेश दिया है कि परीक्षा समाप्त होने के बाद सात दिनों के भीतर अप्रयुक्त प्रश्नपत्रों, ओएमआर शीटों और अन्य गोपनीय सामग्री का नियमानुसार निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

सरकार का कहना है कि यह कदम जिला कोषागारों में जमा परीक्षा सामग्री का बोझ कम करने और भविष्य की परीक्षाओं के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उठाया गया है। लंबे समय तक गोपनीय सामग्री के जमा रहने से सुरक्षा और भंडारण संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो रही थीं।

सभी भर्ती आयोगों और विभागों को निर्देश

मुख्य सचिव द्वारा जारी शासनादेश में कहा गया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित प्रश्नपत्र, ओएमआर शीट और अन्य संवेदनशील दस्तावेज परीक्षा से पहले जिला कोषागारों में सुरक्षित रखे जाते हैं। परीक्षा संपन्न होने के बाद इन सामग्रियों का समय पर निस्तारण किया जाना आवश्यक है, लेकिन कई मामलों में इसमें अनावश्यक देरी हो रही थी।

कोषागारों में बढ़ रहा था दबाव

सरकार के संज्ञान में आया है कि विभिन्न जिलों के कोषागारों में बड़ी मात्रा में परीक्षा सामग्री लंबे समय से जमा है। इससे नई भर्ती परीक्षाओं की गोपनीय सामग्री रखने के लिए स्थान की कमी उत्पन्न हो रही है। कुछ स्थानों पर अतिरिक्त डबल-लॉक व्यवस्था तक करनी पड़ रही थी।

ओएमआर शीटों के निस्तारण पर भी जोर

शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि अंतिम चयन परिणाम घोषित होने के सात दिनों के भीतर अभ्यर्थियों की ओएमआर शीटों और उनसे संबंधित अभिलेखों का भी नियमानुसार निस्तारण किया जाए। जिन परीक्षाओं के परिणाम पहले ही घोषित हो चुके हैं, उनसे जुड़ी लंबित सामग्री को भी प्राथमिकता के आधार पर हटाने के निर्देश दिए गए हैं।

तय होगी जवाबदेही

सरकार ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर गोपनीय सामग्री का निस्तारण नहीं किया जाता है, तो संबंधित अधिकारियों और विभागों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। इस संबंध में आदेश की प्रतियां सभी भर्ती आयोगों, चयन बोर्डों, प्रमुख सचिवों, मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों और कोषागार अधिकारियों को भेज दी गई हैं।

प्रदेश सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से भर्ती परीक्षाओं की गोपनीयता और सुरक्षा को और मजबूत करने के साथ-साथ प्रशासनिक कार्यों में भी पारदर्शिता और दक्षता आएगी।

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