नई दिल्ली। स्कूली छात्र अब मतदाता सूचियों की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के बारे में जानेंगे। एनसीईआरटी ने कक्षा नौ की सामाजिक विज्ञान की किताब में इसे शामिल किया है। ‘अंडरस्टैंडिंग सोसायटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ नाम की किताब में बताया गया है कि ‘इस प्रक्रिया से सभी मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करना सुनिश्चित किया जाता है। खासतौर पर उन युवाओं को जो अभी-अभी 18 साल के हुए हैं और जानकारी की कमी या किसी और वजह से छूट सकते हैं।’ किताब में बताया गया है कि मतदाता के निधन, घर बदलने, एक ही व्यक्ति का नाम कई बार दर्ज होने या उसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाने पर मतदाता सूची से नाम हटाया जाता है। एनसीईआरटी की कक्षा नौ की किताब में न्यायपालिका को निष्पक्ष और स्वतंत्र संस्था बताया गया है।
वर्ण व्यवस्था कर्म आधारित थी :
पुस्तक में लिखा गया है कि वर्ण व्यवस्था ऐसे मूल्यों पर आधारित थी, जिसमें ज्ञान को सर्वोच्च दर्जा दिया जाता था, उसके बाद राजनीतिक शक्ति और धन का स्थान था। बौद्ध ग्रंथ सुत्त निपात के हवाले से बताया गया है कि वर्ण जन्म से नहीं, कर्मों से तय होता था।
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