शिक्षक तैनाती में भेदभाव का आरोप, एक सप्ताह में कार्रवाई नहीं हुई तो हाईकोर्ट जाएगा राजकीय शिक्षक संघ

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 शिक्षक तैनाती में भेदभाव का आरोप, एक सप्ताह में कार्रवाई नहीं हुई तो हाईकोर्ट जाएगा राजकीय शिक्षक संघ

प्रयागराज: राजकीय शिक्षक संघ ने प्रदेश के ग्रामीण और शहरी राजकीय विद्यालयों में प्रधानाचार्यों, प्रवक्ताओं और शिक्षकों की नियुक्ति एवं पदस्थापन में भेदभाव का आरोप लगाया है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की जाएगी।

संघ के प्रांतीय संरक्षक रामेश्वर पांडेय ने बताया कि इस संबंध में अपर मुख्य सचिव, शिक्षा को ज्ञापन देकर तैनाती में व्याप्त विसंगतियों की ओर ध्यान आकर्षित कराया गया है।

संघ का दावा है कि कई विद्यालयों में छात्रों की संख्या अधिक होने के बावजूद प्रधानाचार्य और प्रवक्ता नहीं हैं, जबकि कुछ विद्यालयों में आवश्यकता से अधिक शिक्षकों की तैनाती कर दी गई है।

संघ ने दिए उदाहरण

राजकीय इंटर कॉलेज बार, ललितपुर में करीब 850 विद्यार्थी हैं, लेकिन वहां न तो प्रधानाचार्य है और न ही कोई प्रवक्ता। विद्यालय केवल दो सहायक अध्यापकों के भरोसे संचालित हो रहा है।

राजकीय इंटर कॉलेज कालिंजर, बांदा में 860 छात्र पंजीकृत हैं। यहां विज्ञान, कला, वाणिज्य और कृषि वर्ग संचालित हैं, लेकिन प्रधानाचार्य और किसी भी विषय के प्रवक्ता का पद रिक्त है। विद्यालय केवल तीन सहायक अध्यापकों के सहारे चल रहा है।

वहीं संघ ने आरोप लगाया कि कई शहरी विद्यालयों में आवश्यकता से अधिक तैनाती की गई है। यहां तक कि कुछ ऐसे विषयों के प्रवक्ता भी नियुक्त कर दिए गए हैं, जिन विषयों में विद्यालय में छात्र ही नहीं हैं।

पदस्थापन आदेशों पर भी उठाए सवाल

संघ ने 30 जुलाई 2026 को जारी प्रधानाचार्य पदस्थापन आदेश पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि कई अधिकारियों को विद्यालयों के बजाय बेसिक शिक्षा विभाग के विभिन्न संस्थानों में पदस्थ कर दिया गया, जबकि प्रदेश के अनेक विद्यालय प्रधानाचार्यों और शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं।

संघ ने 28 मार्च 2025 के पदस्थापन आदेश में 31 मई 2026 और 31 जुलाई 2026 को किए गए संशोधनों को निरस्त करने की मांग भी उठाई है। संगठन का कहना है कि कुछ अधिकारियों का पदस्थापन ऐसे विद्यालयों में किया गया है, जहां उपप्रधानाचार्य की आवश्यकता ही नहीं है।

राजकीय शिक्षक संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय में मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा।

शिक्षक तैनाती में भेदभाव का आरोप, एक सप्ताह में कार्रवाई नहीं हुई तो हाईकोर्ट जाएगा राजकीय शिक्षक संघ

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