पैलानी/बांदा। जिस विद्यालय की चौखट से बच्चों के भविष्य की नींव मजबूत होनी चाहिए, वहां यदि शिक्षक ही गायब मिलें और बच्चे जमीन पर बैठकर मिड-डे मील खाने को मजबूर हों, तो सवाल केवल व्यवस्था पर नहीं, बल्कि उस पूरी सोच पर खड़ा होता है जो सरकारी शिक्षा को कागजों में चमकदार और जमीन पर बदहाल बनाए हुए है।पैलानी डेरा प्राथमिक विद्यालय में एसडीएम पैलानी भूपेंद्र सिंह के औचक निरीक्षण ने विद्यालयी व्यवस्था की ऐसी तस्वीर सामने रखी, जिसे देखकर सवाल उठना स्वाभाविक है। निरीक्षण के दौरान दोनों शिक्षामित्र मौजूद मिले, लेकिन सहायक शिक्षक नदारद पाए गए।
एसडीएम ने अनुपस्थित शिक्षक का एक दिन का वेतन रोकते हुए कड़ी फटकार लगाई।सबसे अधिक गंभीर स्थिति तब नजर आई, जब विद्यालय के बच्चे जमीन पर बैठकर मिड-डे मील का भोजन करते मिले। जिन नन्हे हाथों में किताबें और कलम होनी चाहिए, वे यदि बदहाल व्यवस्थाओं के बीच भोजन के लिए जमीन तलाशते दिखाई दें, तो यह केवल एक विद्यालय की तस्वीर नहीं, बल्कि प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था के दावों पर बड़ा सवाल है।एसडीएम भूपेंद्र सिंह ने विद्यालय स्टाफ को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने शिक्षकों को यह भी नसीहत दी कि विद्यालयों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति न होने से सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या लगातार प्रभावित होती है और कई विद्यालय बंद होने की स्थिति तक पहुंच गए हैं।सवाल यह है कि क्या सरकारी नौकरी सिर्फ वेतन लेने का अधिकार है या बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी भी? यदि शिक्षक ही विद्यालय से गायब रहें, तो फिर उन बच्चों को शिक्षा कौन देगा, जिनके अभिभावक सरकारी स्कूल को ही अपने बच्चों के बेहतर भविष्य का सहारा मानते हैं?
एसडीएम का औचक निरीक्षण निश्चित तौर पर आईना दिखाने वाला है, लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होगी। क्या यह कार्रवाई व्यवस्था में स्थायी सुधार लाएगी या फिर निरीक्षण की गाड़ी आगे बढ़ते ही विद्यालय फिर उसी पुराने ढर्रे पर लौट जाएगा?क्योंकि बच्चों का भविष्य कोई सरकारी फाइल नहीं, जिसे लापरवाही की धूल में दबाकर छोड़ दिया जाए।
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