असंवैधानिक नियम के आधार पर कर्मचारी की बर्खास्तगी शून्य, हाईकोर्ट ने 43 साल पुराना मामला पलटा

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 असंवैधानिक नियम के आधार पर कर्मचारी की बर्खास्तगी शून्य, हाईकोर्ट ने 43 साल पुराना मामला पलटा

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि संविधान लागू होने के बाद बनाए गए किसी सेवा नियम को यदि संवैधानिक न्यायालय असंवैधानिक घोषित कर देता है, तो उस नियम के आधार पर की गई बर्खास्तगी शुरू से ही शून्य मानी जाएगी। ऐसे नियम के आधार पर कर्मचारी को कानूनी संरक्षण नहीं दिया जा सकता।

यह फैसला न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने गोरखपुर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के एक क्लर्क की अपील पर सुनवाई करते हुए दिया।

43 साल पुरानी बर्खास्तगी रद्द

मामला बैंक में क्लर्क के पद पर वर्ष 1981 में नियुक्त हुए कर्मचारी से जुड़ा है। उन्हें एक वर्ष की परिवीक्षा पर रखा गया था। बैंक ने 20 जुलाई 1982 को परिवीक्षा अवधि छह महीने के लिए बढ़ा दी। इसके बाद 11 मार्च 1983 को सेवा संतोषजनक न होने का हवाला देते हुए संबंधित नियम के तहत उनकी सेवा समाप्त कर दी गई।

कर्मचारी ने अदालत का रुख किया। वर्ष 1985 में निचली अदालत ने उनके पक्ष में फैसला दिया, लेकिन बैंक की अपील पर यह निर्णय पलट गया। बाद में हाईकोर्ट की एकल पीठ ने वर्ष 2004 में उनकी रिट याचिका खारिज कर दी थी।

जिस नियम के तहत हटाया गया, वह पहले ही असंवैधानिक घोषित

अपील पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने पाया कि कर्मचारी की अधिकतम परिवीक्षा अवधि 19 जनवरी 1983 को समाप्त हो चुकी थी। इसके बाद बिना किसी आदेश के सेवा जारी रहने पर कर्मचारी को स्थायी कर्मचारी माना जाना चाहिए था।

कोर्ट ने यह भी पाया कि जिस नियम के तहत कर्मचारी को सेवा से हटाया गया था, उसे हाईकोर्ट वर्ष 1994 में ही असंवैधानिक घोषित कर चुका था। ऐसे में उस नियम के आधार पर की गई बर्खास्तगी को वैध नहीं माना जा सकता।

बैंक पर 10 हजार रुपये हर्जाना

खंडपीठ ने करीब 43 साल पहले 11 मार्च 1983 को जारी बर्खास्तगी आदेश को निरस्त कर दिया। साथ ही बैंक पर 10 हजार रुपये का हर्जाना भी लगाया गया।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी संवैधानिक न्यायालय द्वारा किसी नियम को असंवैधानिक घोषित किए जाने का प्रभाव केवल उस मामले के पक्षकारों तक सीमित नहीं रहता। संविधान लागू होने के बाद बनाए गए और असंवैधानिक घोषित नियम का अस्तित्व शुरू से ही समाप्त माना जाता है।

हाईकोर्ट के इस फैसले से पुराने सेवा विवादों में असंवैधानिक नियमों के आधार पर की गई कार्रवाई को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति स्पष्ट हुई है।

असंवैधानिक नियम के आधार पर कर्मचारी की बर्खास्तगी शून्य, हाईकोर्ट ने 43 साल पुराना मामला पलटा

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