पढ़ाने का अनोखा अंदाज बना पहचान, अब बिहार की खुशबू को मिलेगा राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार, बांका की बेटी की कहानी
टीचर खुशबू कुमारी ने अपने समर्पण, मेहनत और इनोवेटिव तरीक से बच्चों को पढ़ाई करवाते हुए शिक्षा के क्षेत्र में अलग पहचान बनाई है. उर्दू प्राथमिक विद्यालय, बिदायडीह में प्रधान टीचर के रूप में खुशबू कुमारी काम कर रही हैं. उनका चयन राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए हुआ है. उनकी इस उपलब्धि से बांका जिले के शिक्षा जगत में खुशी और गौरव का माहौल है. राधानगर, कटोरिया की रहने वाली खुशबू कुमारी पिछले 13 वर्षों से अधिक समय से इस क्षेत्र से जुड़ी हैं, बिदायडीह विद्यालय की जिम्मेदारी संभालने से पहले उन्होंने करीब 11 वर्षों तक मध्य विद्यालय कठौन में टीईटी शिक्षिका के रूप में सेवाएं दीं. लंबे शिक्षण अनुभव के दौरान उन्होंने बच्चों की जरूरतों को समझते हुए पढ़ाई को सरल और रोचक बनाने पर विशेष जोर दिया.
आसान तरीके से बच्चो को करवाती हैं पढ़ाई
खुशबू कुमारी की पहचान उनकी अलग और रचनात्मक शिक्षण प्रणाली को लेकर बनी है. उनका मानना है कि छोटे बच्चों के लिए केवल किताबों के जरिए पढ़ाई करना पर्याप्त नहीं है. इसी सोच के साथ वह गीत, संगीत, नृत्य, अभिनय, खेल और विभिन्न गतिविधियों को पढ़ाई का हिस्सा बनाती हैं. कक्षा में बच्चों को सक्रिय रखते हुए वह कठिन विषयों को भी आसान और मनोरंजक तरीके से समझाने का प्रयास करती हैं.
खासकर शुरुआती कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाने के दौरान उनके और से अपनाया गया अनोखा तरीका काफी प्रभावी रहा. पढ़ाई के साथ मनोरंजन का माहौल बनने से बच्चों में कक्षा के प्रति रुचि बढ़ी और वे नियमित रूप से स्कूल आने के लिए प्रेरित हुए. अभिभावकों से लगातार संवाद और विद्यालय की गतिविधियों में उनकी भागीदारी बढ़ाने पर भी उन्होंने विशेष ध्यान दिया.
खुशबू कुमारी का मानना है कि एक शिक्षक की भूमिका केवल कोर्स पूरा करने तक सीमित नहीं होती. शिक्षक बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण, आत्मविश्वास बढ़ाने और उनकी प्रतिभा को सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसी सोच के साथ उन्होंने विद्यालय में बच्चों के सर्वांगीण विकास पर जोर दिया. उनके पति मनीष कुमार आनंद भी शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हैं और प्रधान शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं.
बांका जिले को है गर्व
पारिवारिक सहयोग के साथ स्कूल के सहकर्मियों और अभिभावकों के सहयोग को भी खुशबू कुमारी अपनी सफलता का महत्वपूर्ण आधार मानती हैं. राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन उनकी वर्षों की मेहनत और शिक्षा के प्रति समर्पण का सम्मान है. उनके चयन ने न केवल उनके परिवार और विद्यालय बल्कि पूरे बांका जिले को गौरवान्वित किया है. खुशबू कुमारी की कहानी उन शिक्षकों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी रचनात्मक सोच और मेहनत से बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने में जुटे हैं.
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