यूपी में शिक्षकों के तबादले को लेकर बड़ा मामला, कागजी तलाक का सहारा लेने का आरोप
देहरादून। शिक्षा विभाग में सुगम क्षेत्रों में तबादला पाने के लिए शिक्षकों द्वारा कथित तौर पर कागजी तलाक का सहारा लेने का मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मनचाही जगह तैनाती पाने के लिए शिक्षकों द्वारा अलग-अलग तरीके अपनाए जा रहे हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 1500 से अधिक शिक्षकों के तबादलों में भी ऐसे मामले सामने आए हैं। तबादला प्रक्रिया में माता-पिता की बीमारी, पति-पत्नी की स्थिति, तलाक, विधवा या विधुर होने जैसे कारणों को आधार बनाया गया है।
पति-पत्नी की बीमारी के आधार पर तबादले
शिक्षा विभाग ने इस बार बड़ी संख्या में माता-पिता और सास-ससुर की बीमारी के आधार पर भी शिक्षकों के तबादले किए हैं। विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई शिक्षक अपने आवेदन में बीमार माता-पिता या सास-ससुर की सेवा का आधार देता है, तो संबंधित अधिकारी इसकी जांच करेंगे। गलत पाए जाने पर तबादला रद्द किया जा सकता है।
कागजी तलाक का रास्ता अपनाने का आरोप
रिपोर्ट के अनुसार कुछ शिक्षकों ने मनचाही जगह पर तबादले के लिए पति से तलाक लेने का रास्ता अपनाया। कुछ मामलों में तबादला होने के बाद पति-पत्नी के दोबारा साथ रहने की बात भी सामने आई है। ऐसे मामलों को लेकर विभागीय स्तर पर जांच और आवश्यक कार्रवाई की बात कही गई है।
पहले तलाक, फिर कोर्ट मैरिज का दावा
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि तबादला हासिल करने के लिए कुछ मामलों में पहले तलाक और फिर कोर्ट मैरिज किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, ऐसे मामलों की वास्तविकता और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही हो सकेगी।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि शिकायत मिलती है तो मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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