वेतन विसंगतियों पर मुख्यमंत्री को भेजा पत्र
लखनऊ। सहायता प्राप्त कालेजों के प्रदेशभर के 300 से अधिक शिक्षकों ने उच्च पद व वेतनमान पर कार्यभार ग्रहण करने से उत्पन्न वेतन विसंगतियों को दूर करने की मांग की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर वार्ता के लिए समय मांगा है। पत्र में शिक्षकों ने लिखा है कि अशासकीय महाविद्यालयों में कार्यरत हम शिक्षकों की वेतन संरक्षण संबंधी विसंगतियों को दूर करने के लिए पिछले सात सालों से दर-दर भटक रहे हैं। शिक्षकों ने कहा है कि उनके वेतन संरक्षण किए को लेकर राज्य सरकार की ओर से शासनादेश जारी किया गया है।
इसके अतिरिक्त समय-समय पर उनके सरलीकरण संबंधित तथा स्पष्टीकरण संबंधी शासनादेश वर्ष 2003, 2005, 2006, 2016, 2018, 2020, 2022 में जारी किए गए हैं। राजकीय कार्मिकों को वेतन संरक्षण का लाभ मिल रहा है, लेकिन अनुदानित अशासकीय इंटर कॉलेज में प्रवक्ता पद से सरकार द्वारा अनुदानित अशासकीय डिग्री कॉलेज में उच्च पद तथा उच्च वेतनमान में सहायक सहायक आचार्य पद पर कार्यभार ग्रहण करने वाले शिक्षकों को वेतन संरक्षण का लाभ उच्च शिक्षा विभाग द्वारा नहीं दिया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि एक अशासकीय अनुदानित महाविद्यालय से दूसरे अशासकीय अनुदानित महाविद्यालय में समान वेतनमान में कार्यभार ग्रहण करने वाले शिक्षकों को 26-12-1988 के शासनादेश के क्रम में वेतन संरक्षण के लाभ की व्यवस्था अभी तक उपलब्ध है। इसको बाद में न सरलीकरण किया गया और न ही कोई नया शासनादेश जारी हुआ।
नतीजा अनुदानित इंटर कॉलेज व अन्य सेवाओं से अशासकीय अनुदानित महाविद्यालय में सहायक आचार्य पद पर कार्यभार ग्रहण करने वाले वेतन संरक्षण के लाभ से वंचित है। वेतन संरक्षण संबंधी ऐसे प्रकरणों के निस्तारण के लिए उच्च शिक्षा निदेशक की ओर से इस बारे में शासन से मार्गदर्शन के लिए दर्जनो पत्र भेजे जा चुके हैं किंतु अभी तक कोई भी जवाब शासन से नहीं भेजा जा सका है। नतीजा ऐसे शिक्षकों को वेतन संरक्षण के लाभ आज तक प्राप्त नहीं हो सका है।
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