सरकारी कर्मी की बर्खास्तगी मौत की सजा के समान: कोर्ट
नई दिल्ली, एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि सरकारी कर्मचारी के लिए नौकरी से बर्खास्तगी की सजा मौत की सजा से कम नहीं है। कोर्ट ने तमिलनाडु के पेरियार यूनिवर्सिटी के एक डिप्टी रजिस्ट्रार को फिर से बहाल करने का निर्देश दिया, जिन्हें आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में नौकरी से निकाल दिया गया था।
न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर की पीठ ने मद्रास हाईकोर्ट की खंडपीठ के आदेश को रद्द कर दिया और एकल जज की पीठ के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें आर. सरवनन को फिर से नौकरी पर रखने का आदेश दिया गया था। शीर्ष अदालत ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा गठित एक सदस्यीय आयोग की जांच रिपोर्ट से पता चलता है कि अपीलकर्ता को बिना किसी सबूत के दोषी ठहरा दिया गया। कोर्ट ने कहा कि खंडपीठ ने बिना किसी ठोस और उचित कारण के एकल जज की पीठ के फैसले में दखल दिया। 16 अक्तूबर के अपने आदेश में पीठ ने कहा कि नौकरी से बर्खास्त करना या हटाना सबसे कठोर सजा है, जो सरकारी कर्मचारी के लिए मौत की सजा से कम नहीं है।
Basic Shiksha Khabar | PRIMARY KA MASTER | SHIKSHAMITRA | Basic Shiksha News | Primarykamaster | Updatemarts | Primary Ka Master | Basic Shiksha News | Uptet News | primarykamaster | SHIKSHAMITRA



