गुरुजी की जेब से पक रही मिडडे मील की थाली
अछल्दा। ब्लॉक के 160 से अधिक परिषदीय व एडेड स्कूलों में मिड-डे-मील योजना बजट संकट से जूझ रही है। पिछले छह माह (मई माह) से कंवर्जन कॉस्ट का भुगतान नहीं हुआ है। इससे शिक्षकों को अपनी जेब से पैसे खर्च कर बच्चों के भोजन की व्यवस्था करनी पड़ रही है।
प्राथमिक स्तर पर प्रति छात्र 6.78 रुपये और उच्च प्राथमिक स्तर पर 10.17 रुपये की कंवर्जन कॉस्ट निर्धारित है। इसी राशि से हरी सब्जियां, दाल, तेल, घी, मसाले और एलपीजी गैस सिलिंडर जैसी जरूरी चीजें खरीदी जाती हैं। छह माह से बजट न पहुंचने के कारण रसोई का खर्च चलाना शिक्षकों के लिए भारी आर्थिक बोझ बन गया है। योजना के नियमों के अनुसार, बच्चों को सप्ताह में एक दिन फल दिए जाने का प्रावधान है। इसके लिए प्रति फल चार रुपये का बजट तय किया गया है। शिक्षकों का कहना है कि मौजूदा महंगाई में चार रुपये में गुणवत्तापूर्ण फल खरीदना असंभव है। इससे फल वितरण की व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
जिला समन्वयक मिड-डे-मील नमन पांडेय ने इस मामले पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मई से सितंबर तक के फल भुगतान की पत्रावली भेजी जा चुकी है। यह भुगतान दिवाली से पहले हो जाएगा। साथ ही, मई से अक्तूबर तक की कंवर्जन कॉस्ट का भुगतान भी दिवाली से पहले शिक्षकों के खातों में पहुंच जाएगा।।
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