परिषदीय शिक्षकों की पदोन्नति में वरिष्ठता सूची का बढ़ा विवाद
परिषदीय शिक्षकों की पदोन्नति में वरिष्ठता सूची का विवाद गहराने लगा है। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियमावली 1981 के तहत वरिष्ठता निर्धारण के लिए मौलिक नियुक्ति की तिथि को आधार बनाए जाने का प्रावधान है।
हालांकि कौशाम्बी समेत कुछ जिलों में वरिष्ठता निर्धारण के लिए शिक्षकों की विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने की तिथि को आधार बनाया जा रहा है। नियमों की अनदेखी से भविष्य में अनावश्यक विवाद एवं न्यायिक मुकदमें होना तय है। शिक्षकों के सेवा मामलों के जानकार अतुल द्विवेदी का कहना है कि पदोन्नति के लिए वरिष्ठता सूची मौलिक नियुक्ति तिथि के आधार पर बनाई जानी चाहिए न कि कार्यभार ग्रहण करने की तिथि को। प्रयागराज, मैनपुरी समेत अधिकांश जिलों में मौलिक नियुक्ति तिथि के आधार पर ही सूची बनाई जा रही है। कौशाम्बी सहित अन्य जिलों में गड़बड़ी के कारण पूरी प्रक्रिया बाधित होने की आशंका है।
उदाहरण के तौर पर यदि किसी शिक्षक का नियुक्ति आदेश एक मई को जारी हुआ हो और उसने नियुक्ति आदेश में निर्धारित समय के भीतर पांच मई को विद्यालय में कार्यभार ग्रहण किया हो, तो उसकी वरिष्ठता एक मई से निर्धारित होनी चाहिए लेकिन कुछ जिलों में पांच मई को आधार बनाया जा रहा है।
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