सुप्रीम कोर्ट आज पदोन्नति में टीईटी (TET) की अनिवार्यता पर अहम फैसला सुनाने जा रहा है, जिससे देशभर के लाखों शिक्षकों की उम्मीदें जुड़ी हैं.
सर्वोच्च न्यायालय का बड़ा फैसला
इस केस की पिछली सुनवाई 3 अप्रैल 2025 को हुई थी और आज 1 सितंबर को अंजुमन इशात ए तालीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र सरकार की मुख्य याचिका पर निर्णय आएगा. मामले में यह तय होगा कि उच्च प्राथमिक स्कूलों के प्रमोशन या नियुक्ति के लिए टीईटी अनिवार्य होगी या नहीं. साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि अल्पसंख्यक स्कूलों में आरटीई कानून लागू होगा या नहीं, और वरिष्ठता पहली नियुक्ति तिथि से मानी जाएगी या पहली प्रमोशन तिथि से.
शिक्षा विभाग और शिक्षकों पर असर
इस फैसले का असर पूरे भारत के शिक्षा विभाग और शिक्षकों की प्रमोशन प्रक्रिया पर होगा. इलाहाबाद हाईकोर्ट (2017) और मद्रास हाईकोर्ट (2023) के विवादित आदेशों के बाद कई राज्य सरकारों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. टीईटी को अनिवार्य मानने पर वर्षों से कई राज्यों की प्रमोशन प्रक्रिया रुकी हुई है.
क्या मुद्दे तय होंगे?
प्रमोशन में टीईटी की अनिवार्यता
वरिष्ठता का आधार: नियुक्ति तिथि या पदोन्नति तिथि
अल्पसंख्यक संस्था में आरटीई की स्थिति
सुप्रीम कोर्ट का फैसला शिक्षकों की प्रोफेशनल स्थिरता और शिक्षा व्यवस्था की दिशा दोनों को तय करेगा.
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