नई दिल्ली, । सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा कथित तौर पर एआई से तैयार फर्जी फैसलों पर भरोसा करने और फैसला पारित करने पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि ऐसे आदेश न सिर्फ विधिक त्रुटि हैं बल्कि यह कदाचार की श्रेणी में आ सकता है।
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और आलोक आराधे की पीठ ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। जस्टिस नरसिम्महा ने जज को आगाह करते हुए कहा कि ‘ट्रायल कोर्ट द्वारा एआई से तैयार गैर-मौजूद फर्जी अथवा कृत्रिम निर्णयों का उपयोग न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सीधा प्रभाव डालता है। उन्होंने कहा, ऐसे आदेश पारित करने के विधिक परिणाम होंगे। पीठ ने कहा कि इस मुद्दे की विस्तृत पड़ताल जरूरी है। यह मामला विवाद के गुण-दोष से अधिक फैसला देने की प्रक्रिया से जुड़ी गंभीर संस्थागत चिंता का विषय है। कोर्ट ने अटार्नी जनरल, सॉलिसिटर जनरल को इस मामले में पक्ष रखने को कहा है।
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