बार से सीधे नियुक्त हुईं बी.वी. नागरत्ना (मोहना) देश की दूसरी महिला जज, सुप्रीम कोर्ट की ताकत अब ऐतिहासिक स्तर पर
नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के पांच नए न्यायाधीशों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इन नियुक्तियों के साथ ही सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 37 हो गई है, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है।
नई नियुक्तियों में एक वरिष्ठ महिला अधिवक्ता की सीधी नियुक्ति विशेष चर्चा का विषय बनी हुई है। वह बार से सीधे सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश बनने वाली देश की दूसरी महिला हैं। इससे पहले वर्ष 2018 में जस्टिस इंदु मल्होत्रा को सीधे बार से सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किया गया था।
ये हैं सुप्रीम कोर्ट के पांच नए न्यायाधीश
जस्टिस शील नागू (61)
जस्टिस शील नागू ने अपने कानूनी करियर की शुरुआत मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से की थी। वर्ष 2013 में वे स्थायी न्यायाधीश बने और बाद में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किए गए। न्यायिक क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए उन्हें सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किया गया है।
जस्टिस श्री चंद्रशेखर (61)
जस्टिस चंद्रशेखर ने झारखंड हाईकोर्ट में न्यायिक सेवाएं दीं और बाद में वहां के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश भी रहे। सितंबर 2025 में उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया था।
जस्टिस संजीव सचदेवा (61)
दिल्ली हाईकोर्ट से जुड़े रहे जस्टिस सचदेवा ने वर्ष 2013 में न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाला था। बाद में उनका तबादला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट किया गया, जहां उन्होंने मुख्य न्यायाधीश के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई।
जस्टिस अरुण पल्ली (60)
पंजाब विश्वविद्यालय से कानून की शिक्षा प्राप्त करने वाले जस्टिस अरुण पल्ली वर्ष 2013 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायाधीश बने थे। अप्रैल 2025 में उन्हें जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया था।
जस्टिस बी.वी. मोहना (59)
वरिष्ठ अधिवक्ता बी.वी. मोहना वर्ष 1988 से वकालत के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्ष 2015 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा प्रदान किया था। वे बार से सीधे सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त होने वाली देश की दूसरी महिला न्यायाधीश बनी हैं।
न्यायपालिका में बढ़ेगी क्षमता
पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति से सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। न्यायपालिका के विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से मामलों की सुनवाई की गति तेज होगी और न्यायिक व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
नई नियुक्तियों को न्यायपालिका के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे सर्वोच्च न्यायालय की कार्यक्षमता और प्रभावशीलता दोनों में वृद्धि होगी।
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