योगी सरकार का बड़ा फैसला: सरकारी वकीलों का मानदेय बढ़ा, रिटेनरशिप और बहस फीस में हुई बढ़ोतरी
लखनऊ: मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य के सरकारी वकीलों को बड़ी राहत देते हुए उनके मानदेय में उल्लेखनीय वृद्धि का फैसला किया गया है। सरकार ने राज्य विधि अधिकारियों को
मिलने वाली मासिक रिटेनरशिप और प्रतिदिन की बहस फीस के नए संशोधित दरों को मंजूरी दे दी है।
नई व्यवस्था के तहत जिला शासकीय अधिवक्ताओं की मासिक रिटेनरशिप 9,000 रुपये से बढ़ाकर 14,000 रुपये कर दी गई है, जबकि प्रतिदिन की बहस फीस 1,650 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दी गई है।
इसी प्रकार अपर जिला शासकीय अधिवक्ताओं की रिटेनरशिप 7,200 रुपये से बढ़ाकर 11,000 रुपये तथा बहस फीस 1,500 रुपये से बढ़ाकर 2,300 रुपये कर दी गई है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ताओं को अब 10,000 रुपये मासिक रिटेनरशिप मिलेगी, जो पहले 6,300 रुपये थी। उनकी बहस फीस भी बढ़ाकर 2,300 रुपये कर दी गई है।
उप जिला शासकीय अधिवक्ताओं की रिटेनरशिप 5,400 रुपये से बढ़ाकर 9,000 रुपये कर दी गई है, जबकि प्रतिदिन की फीस 1,275 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये कर दी गई है। नामित एवं विशेष अधिवक्ताओं तथा न्याय मित्र (दीवानी एवं फौजदारी) को अब 1,500 रुपये के स्थान पर 2,300 रुपये प्रतिदिन दिए जाएंगे।
महाधिवक्ता को मिलेगा 1.25 लाख रुपये मासिक रिटेनरशिप
राज्य के महाधिवक्ता की मासिक रिटेनरशिप 75,000 रुपये से बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये कर दी गई है। वहीं उनकी बहस फीस 40,000 रुपये से बढ़ाकर 60,000 रुपये कर दी गई है। मुख्य स्थायी अधिवक्ता की रिटेनरशिप भी 22,000 रुपये से बढ़ाकर 35,000 रुपये कर दी गई है, जबकि बहस फीस 12,000 रुपये निर्धारित की गई है।
कैबिनेट ने लिए 24 महत्वपूर्ण फैसले
कैबिनेट बैठक में कुल 24 अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण एवं नए शहर प्रोत्साहन योजना के तहत आगरा, बरेली और प्रयागराज के लिए वित्तीय सहायता को स्वीकृति दी गई है। भूमि अधिग्रहण पर होने वाले व्यय का 50 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार आगामी 20 वर्षों तक वहन करेगी।
इसके अलावा मंत्रिपरिषद ने वर्ष 2026-27 के लिए 356 करोड़ रुपये से अधिक की सीड कैपिटल राशि को मंजूरी दी तथा नई उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति को भी स्वीकृति प्रदान की। पंचायती संस्थाओं के वार्षिक प्रतिवेदनों को विधानमंडल के समक्ष प्रस्तुत किए जाने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी मिल गई।
1725 नई इलेक्ट्रिक बसों को मंजूरी
कैबिनेट ने लखनऊ के मोहनलालगंज में उपनिबंधक कार्यालय के लिए 953 वर्गमीटर भूमि 90 वर्ष की लीज पर उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। साथ ही राज्य के 17 नगर निगमों, नोएडा और (जेवर एयरपोर्ट) के लिए 1,725 नई इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के प्रस्ताव पर भी मुहर लगा दी गई है।
सरकार के इन फैसलों को विधि अधिकारियों के हितों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, वहीं शहरी विकास, स्टार्टअप प्रोत्साहन और सार्वजनिक परिवहन को भी इससे नई गति मिलने की उम्मीद है।
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