प्रदेश के राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य के पदों को सीधी भर्ती व पदोन्नति से भरने का रास्ता साफ हो गया है। कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश शैक्षिक (सामान्य शिक्षा संवर्ग) सेवा नियमावली 2025 पांचवें संशोधन को लागू करने की सहमति दे दी है। इससे पदोन्नति व सीधी भर्ती के लगभग 1000 पदों को भरे जाने का रास्ता साफ हो गया है।
माध्यमिक शिक्षा विभाग में समूह ख के पदों पर पुरुष शाखा के लिए 61, महिला शाखा के लिए 22 व निरीक्षण (अधिकारी कोटा) शाखा के लिए कोटा 17 प्रतिशत था। इसे बढ़ाकर क्रमश: 33, 33 व 34 फीसदी करने का प्रस्ताव दिया था। विभाग के अनुसार समूह ख में पदोन्नति कोटा इसलिए बढ़ाना प्रस्तावित है, क्योंकि निरीक्षण शाखा संवर्ग के पुर्नगठन में अधिकारियों की संख्या व वेतन में अंतर आया है। जबकि पूर्व में इसमें सिर्फ डीआई शामिल थे। इसलिए कोटे के पुर्ननिर्धारण की जरूरत है। जिसे कैबिनेट ने सहमति दी।
इसी प्रकार प्रधानाचार्य राजकीय इंटर कॉलेज (बालक व बालिका) के पदों के लिए सीधी भर्ती में शैक्षिक अर्हता मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय, मानित विश्वविद्यालय, संस्था से पीजी व किसी भी मान्यता प्राप्त विवि से बीएड या समकक्षता उपाधि, हाईस्कूल-इंटर या उच्च कक्षाओं में किसी विश्वविद्यालय, महाविद्यालय में नियमित रूप से नियुक्ति, तीन साल तक पढ़ाने का अनुभव था। इसमें संशोधन करते हुए मान्यता प्राप्त विवि से बीएड या समकक्षता उपाधि के स्थान पर एनसीईटी द्वारा मान्यता प्राप्त विवि से बीएड की उपाधि कर दिया गया है।
अन्य अर्हता पूर्व की भांति रहेगी। विभागीय अधिकारियों ने कहा कि सामान्य शिक्षा संवर्ग सेवा नियमावली 1992 में लंबे समय से विवाद चल रहा था, इससे 2018 से पुरुष, महिला व निरीक्षण शाखा में भर्ती व पदोन्नति नहीं हो रही थी। जिससे राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य के लगभग 700 पद खाली चल रहे हैं। वहीं सीधी भर्ती के भी लगभग 300 पद खाली हैं। समकक्षता निर्धारित होने के बाद अब इन्हें भी भरा जा सकेगा।
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